ई-ट्राईसाइकिल से स्कूल जाती हुई एक दिव्यांग छात्रा

जौनपुर: दिव्यांग छात्राओं को मिलेगी मुफ्त ई-ट्राईसाइकिल, जानें पात्रता

जौनपुर: 16 वर्ष से अधिक की अध्ययनरत दिव्यांग छात्राओं को मिलेगी मुफ्त ‘ई-ट्राईसाइकिल’, एक सप्ताह में मांगा गया ब्यौरा”

जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : अब्दुल हई राजा की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसी कड़ी में जौनपुर जिला प्रशासन ने शिक्षा प्राप्त कर रही दिव्यांग छात्राओं को बड़ी सहूलियत देने का निर्णय लिया है।

जनपद में 16 वर्ष या उससे अधिक आयु की स्कूल/कॉलेज जाने वाली दिव्यांग छात्राओं को सरकार की ओर से मुफ्त ‘ई-ट्राईसाइकिल’ प्रदान की जाएगी।

हर विधानसभा क्षेत्र में 20 ई-ट्राईसाइकिल का लक्ष्य

जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी ने बताया कि ‘निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश’ के निर्देशों के क्रम में यह पहल की जा रही है।

  • चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए “ई-ट्राईसाइकिल अनुदान नियमावली, 2026” के तहत प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए 20 ई-ट्राईसाइकिल का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पात्र लाभार्थियों का चिन्हांकन कर जल्द से जल्द सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

DIOS और BSA को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

योजना का लाभ सही लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • उन्हें अपने अधीनस्थ सभी विद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत 16 वर्ष या उससे अधिक आयु की दिव्यांग छात्राओं का डाटा जुटाने को कहा गया है।

  • अधिकारियों को यह विस्तृत सूची निर्धारित प्रारूप में तैयार कर मात्र 01 सप्ताह के भीतर जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी।

आवेदन के लिए आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज:

विभाग द्वारा शिक्षण संस्थानों से छात्राओं का निम्नलिखित ब्यौरा मांगा गया है:

  • दिव्यांग छात्रा का नाम और आयु

  • अभिभावक का नाम और पूरा पता

  • अभिभावक और विद्यालय प्रबंधक का मोबाइल नंबर

  • विद्यालय/संस्था का नाम और कक्षा (जिसमें छात्रा अध्ययनरत है)

  • संलग्नक (दस्तावेज): दिव्यांग प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड की प्रति और एक पासपोर्ट साइज फोटो।

इस त्वरित कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा प्राप्त कर रही दिव्यांग छात्राओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो और वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।