जौनपुर: बिना नर्सरी धान की सीधी बुवाई (DSR) से बंपर पैदावार
जौनपुर के किसानों के लिए खास खबर: बिना नर्सरी तैयार किए धान की ‘सीधी बुवाई’ (DSR) से होगी बंपर पैदावार, बचेगा पानी और पैसा”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
खरीफ मौसम की दस्तक के साथ ही जौनपुर जनपद में धान की खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिले में धान मुख्य फसल है, जिसकी खेती 1,53,531 हेक्टेयर (कुल खरीफ आच्छादन का 70%) क्षेत्रफल में होती है।
पारंपरिक तौर पर किसान नर्सरी विधि से धान लगाते हैं, जिसमें अधिक पानी, श्रम और लागत लगती है।
निरंतर गिरते भूजल स्तर और बढ़ती लागत को देखते हुए कृषि विभाग (सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ‘आत्मा’ योजना) के उप परियोजना निदेशक डॉ. रमेश चंद्र यादव ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (DSR – Direct Seeded Rice) तकनीक अपनाने की महत्वपूर्ण सलाह दी है।
क्या है DSR तकनीक और बुवाई का सही समय?
धान की सीधी बुवाई एक आधुनिक और कम लागत वाली तकनीक है, जिसमें नर्सरी तैयार किए बिना सीधे खेत में बीज बोए जाते हैं।
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बुवाई का समय: इस विधि से धान की बुवाई के लिए 25 मई से 10 जून तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
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बीज की मात्रा और गहराई: जीरोटिल (Zero-till) या सीडड्रिल मशीन से 1 से 2 इंच की गहराई पर धान की बुवाई की जाती है। इसमें प्रति एकड़ केवल 8 से 10 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है।
सीधी बुवाई (DSR) के 4 सबसे बड़े फायदे कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस आधुनिक तकनीक से किसानों और पर्यावरण दोनों को भारी लाभ होता है:
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पानी और लागत की बचत: इस विधि में पारंपरिक खेती के मुकाबले 20 से 30% कम पानी लगता है और कुल लागत में 15 से 20% तक की भारी कमी आती है।
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मजदूरी से राहत: नर्सरी लगाने और उखाड़कर रोपने का झंझट खत्म होने से श्रमिकों (मजदूरों) पर होने वाला खर्च बचता है।
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अधिक पैदावार: खेत में बार-बार पानी सूखने पर सिंचाई करने से मिट्टी में वायु संचार (Aeration) बढ़ता है, जिसके फलस्वरूप उत्पादन अधिक प्राप्त होता है।
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पर्यावरण संरक्षण: इस तकनीक से खेती करने पर खेत में लगातार पानी भरने की जरूरत नहीं होती, जिससे ग्रीनहाउस गैस, विशेषकर ‘मीथेन’ (Methane) का उत्सर्जन काफी कम होता है।
सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन पर विशेष ध्यान
डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि सीधी बुवाई में खेत में पानी खड़ा (Waterlogging) नहीं किया जाता, बल्कि बराबर नमी बनाए रखना जरूरी है।
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बुवाई के तुरंत बाद (24 से 36 घंटे के अंदर) खेत में पेंडिमेथिलिन (Pendimethalin) दवा का छिड़काव अवश्य करना चाहिए, ताकि खरपतवार को रोका जा सके।
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पहली सिंचाई बुवाई के 15 से 20 दिन बाद ही करनी चाहिए। सही समय पर निराई-गुड़ाई कर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
‘आत्मा’ योजना के तहत 150 हेक्टेयर में होगा लाइव प्रदर्शन
किसानों को जागरूक करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विभाग ने बड़ा लक्ष्य रखा है। ‘आत्मा’ (ATMA) योजना के अंतर्गत इस खरीफ मौसम में जनपद में कुल 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में DSR तकनीक से धान की खेती के लाइव प्रदर्शन (Demonstration) कराए जाएंगे।
इन खेतों पर ‘प्रक्षेत्र दिवस’ आयोजित कर अन्य किसानों को भी इस तकनीक के फायदे बताए जाएंगे।











