पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी की तस्वीर के साथ भारतीय नागरिकता के नियम और कानूनी दस्तावेज को समझाता हुआ प्रतीकात्मक चित्र।

भारत में नागरिकता का असली प्रमाण क्या: पासपोर्ट, आधार या वोटर ID?

क्या आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी हैं नागरिकता का प्रमाण? जानिए संविधान और कानून के तहत असल में भारत का नागरिक कौन है”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश में समय-समय पर यह बहस छिड़ती रही है कि क्या पासपोर्ट भारतीय नागरिक होने का अंतिम प्रमाण है?

क्या वोटर आई कार्ड नागरिकता साबित करता है? या फिर क्या आधार कार्ड नागरिकता का दस्तावेज है? इन सवालों पर अक्सर विवाद और भ्रम की स्थिति बनी रहती है।

सच यह है कि पासपोर्ट, वोटर आईडी या आधार नागरिकता तय नहीं करते। भारत में नागरिकता का निर्धारण केवल संविधान और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है।

वहीं, पासपोर्ट अधिनियम (1967) विदेश यात्रा के लिए है, वोटर आईडी मतदान के लिए है और आधार एक सामान्य पहचान पत्र है। आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

नागरिकता पर क्या कहता है भारतीय संविधान?

भारत में नागरिकता का मूल आधार संविधान के ‘अनुच्छेद 5 से 11’ और ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ हैं:

  • अनुच्छेद 5: संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) भारत में निवास करने वाले और भारत से संबंध रखने वाले लोगों (जिनका या जिनके माता-पिता का जन्म भारत में हुआ हो) को नागरिकता दी गई।

  • अनुच्छेद 6 से 8: इसमें विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए, भारत से पाकिस्तान जाकर लौटे और विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की नागरिकता के नियम शामिल हैं।

  • अनुच्छेद 9: यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

  • अनुच्छेद 10 और 11: ये अनुच्छेद संसद को नागरिकता से जुड़े नए कानून बनाने का अधिकार देते हैं।

भारत की नागरिकता पाने के 5 कानूनी तरीके:

  1. जन्म द्वारा (By Birth): 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मे लोग। इसके बाद जन्मे लोगों के लिए माता या पिता में से किसी एक का भारतीय होना अनिवार्य है।

  2. वंश/पैतृक आधार पर (By Descent): भारत के बाहर जन्मे वे लोग, जिनके माता-पिता जन्म के समय भारतीय नागरिक थे।

  3. पंजीकरण द्वारा (By Registration): भारतीय मूल के व्यक्ति या भारतीय नागरिकों से विवाह करने वाले विदेशी जो निर्धारित निवास शर्तें पूरी करते हों।

  4. प्राकृतिककरण द्वारा (By Naturalization): कानूनी रूप से भारत में रहने वाले विदेशी नागरिक जो भाषा, चरित्र और निवास की शर्तें पूरी करते हों।

  5. क्षेत्र विलय द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि कोई नया भूभाग भारत का हिस्सा बनता है, तो वहां के निवासियों को नागरिकता मिल जाती है।

पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी की असल कानूनी हैसियत क्या है?

  • क्या पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है?

  • पासपोर्ट एक बेहद महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, लेकिन यह नागरिकता का ‘अंतिम या निर्णायक प्रमाण’ नहीं है। यह पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत मात्र विदेश यात्रा की अनुमति देने वाला दस्तावेज है।

  • आधार कार्ड क्या है?

  • आधार कार्ड पूरी तरह से सिर्फ एक ‘पहचान पत्र’ और ‘पते का प्रमाण’ है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण बिल्कुल नहीं माना जा सकता। यह भारत में रहने वाले निवासियों (Residents) को जारी किया जाता है।

  • वोटर आई कार्ड (Voter ID)

  • संविधान का अनुच्छेद 326 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की गारंटी देता है (जिसमें 1989 में उम्र 21 से घटाकर 18 की गई)।

  • हालांकि भारत में वोट देने का अधिकार केवल ‘भारतीय नागरिकों’ को है, लेकिन वोटर आईडी होना नागरिकता का अंतिम कानूनी पैमाना नहीं है।

निष्कर्ष: तो फिर नागरिक कौन है?

जौनपुर के जाने-माने एडवोकेट शिवबचन सरोज ने  इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताते हैं, “हम खुद ही घोषित करते हैं कि भारतीय संविधान और सिटीजनशिप एक्ट के तहत हम भारत के नागरिक हैं।

यही ‘क्वेश्चन ऑफ फैक्ट’ (Question of Fact) है। अगर हम संविधान और कानूनी क्राइटेरिया (मापदंड) में आते हैं, तो हम भारत के नागरिक हैं; इसके लिए कोई अलग से एकल दस्तावेज नहीं है।”

हाँ, यह बात जरूर तय है कि आप कानूनी रूप से नागरिकता के क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, उसी के आधार पर आपका पासपोर्ट या वोटर आई कार्ड बनता है।

यानी पासपोर्ट और वोटर आई कार्ड केवल एक ‘भारतीय नागरिक’ को ही मिल सकता है, लेकिन महज इन दस्तावेजों का पास होना ही नागरिकता का इकलौता और अंतिम कानूनी प्रमाण (Ultimate Proof) नहीं है।