अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई: इतिहास, महत्व और संरक्षण
पृथ्वी पर जीवन का आधार है ‘जैव विविधता’: जानें क्यों मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस और क्या है मानव जीवन में इसका महत्व”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
हमारी पृथ्वी सिर्फ इंसानों का घर नहीं है, बल्कि यह लाखों-करोड़ों जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और सूक्ष्म जीवों की साझी धरोहर है।
इसी प्राकृतिक खजाने और जीवन के संतुलन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 22 मई को दुनिया भर में “अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस” (International Day for Biological Diversity) मनाया जाता है।
वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारी जैव विविधता गंभीर संकट से गुजर रही है। ऐसे में यह दिन हमें प्रकृति संरक्षण की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है।
क्या है जैव विविधता और इसका इतिहास?
जैव विविधता का सीधा अर्थ पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के जीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की विविधता से है।
इसे मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है— आनुवंशिक विविधता, प्रजातीय विविधता और पारिस्थितिक विविधता।
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इतिहास: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1993 में ‘जैव विविधता पर कन्वेंशन’ को लागू किया था। शुरुआत में यह दिवस 29 दिसंबर को मनाया जाता था, लेकिन वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र ने इसकी तारीख बदलकर 22 मई कर दी।
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22 मई ही क्यों? दरअसल, 22 मई 1992 को ही नैरोबी में जैव विविधता कन्वेंशन के ऐतिहासिक मसौदे को स्वीकार किया गया था।
मानव जीवन के लिए क्यों वरदान है जैव विविधता?
जैव विविधता केवल जंगलों और वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन का पूरा चक्र इसी पर टिका है:
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खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा: पृथ्वी पर उपलब्ध भोजन, ईंधन और प्राकृतिक संसाधन सीधे तौर पर जैव विविधता की देन हैं।
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आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा तक में इस्तेमाल होने वाली कई औषधियां प्राकृतिक पौधों और जीवों से बनती हैं।
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जलवायु संतुलन: वन और विशाल समुद्र कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ग्लोबल वार्मिंग को रोकते हैं और जलवायु का संतुलन बनाए रखते हैं। कृषि में परागण करने वाले कीट हमारी खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं।
जैव विविधता पर मंडराता गंभीर संकट
तेजी से बढ़ती जनसंख्या, अंधाधुंध औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण जंगल तेजी से कट रहे हैं।
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प्लास्टिक प्रदूषण और रासायनिक कचरे ने जल स्रोतों को जहरीला कर दिया है, जिससे समुद्री जीव भारी संख्या में मर रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार के कारण कई दुर्लभ प्रजातियों का अस्तित्व ही मिटने की कगार पर पहुंच गया है।
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वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले वर्षों में कई प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी।
भारत की समृद्ध जैव विविधता और हमारे प्रयास
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में गिना जाता है, जहां की जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध है। हिमालय, पश्चिमी घाट, सुंदरबन और पूर्वोत्तर क्षेत्र अनेक दुर्लभ प्रजातियों का घर हैं।
भारत सरकार ने इसके संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ और ‘नमामि गंगे’ जैसी कई योजनाएं चलाई हैं।
देश में कई राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिजर्व बनाए गए हैं। इसके बावजूद, तेजी से बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हम और आप क्या कर सकते हैं?
जैव विविधता का संरक्षण सिर्फ सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसमें आम जनता की भागीदारी सबसे अहम है:
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पेड़ लगाना, पानी बचाना और सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करना।
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पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) जीवनशैली अपनाना और ऊर्जा की बचत करना।
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जैविक खेती को बढ़ावा देना और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति समाज को जागरूक करना।
अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हमें यह स्पष्ट संदेश देता है कि यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित और समृद्ध रह सकेगा। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।











