शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दूसरी तरफ गृह मंत्री अमित शाह व आईबी मुख्यालय की प्रतीकात्मक तस्वीर

NEET विवाद की Inside Story : क्या था IB का ’48 घंटे’ का अलर्ट ?

NEET विवाद की इनसाइड स्टोरी: IB का ’48 घंटे’ वाला अलर्ट और अमित शाह की रिपोर्ट, जिसने करा दिया शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा!

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर देश भर में भड़के छात्र आंदोलन के आगे आखिरकार मोदी सरकार को झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि महज चार दिन पहले तक केंद्र सरकार हर हाल में धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बचाने की कोशिश में जुटी थी?

फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि 24 घंटे के भीतर ही सरकार को इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा?

सूत्रों के मुताबिक, प्रधान के इस्तीफे से ठीक 24 घंटे पहले आईबी (Intelligence Bureau), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संघ-भाजपा (RSS-BJP) की अलग-अलग खुफिया रिपोर्टों ने सरकार की नींद उड़ा दी थी।

इन रिपोर्टों में साफ चेतावनी दी गई थी कि अगर तुरंत कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो हालात पूरी तरह से बेकाबू हो सकते हैं।

IB का सबसे बड़ा अलर्ट: ’48 घंटे में हाथ से निकल जाएगा आंदोलन’

शीर्ष सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसी आईबी की रिपोर्ट में सबसे बड़ा और गंभीर अलर्ट दिया गया था।

आईबी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि सरकार द्वारा हालात संभालने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का छात्रों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।

एजेंसी ने अंदेशा जताया कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन सरकार के हाथ से पूरी तरह निकल जाएगा।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि रविवार और सोमवार तक युवाओं का यह प्रदर्शन ‘पूर्ण रूप से बेकाबू’ हो सकता है।

अमित शाह और RSS की रिपोर्ट: ‘विपक्षी एकता’ का डर

आईबी के अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने भी सरकार पर दबाव बनाया:

  • गृह मंत्री अमित शाह की रिपोर्ट: केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक रिपोर्ट सौंपी।
  • इसमें खुफिया एजेंसियों के इनपुट शामिल थे। शाह की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकला, तो ‘विपक्षी एकता’ फिर से मजबूत हो सकती है और वे इसका राजनीतिक फायदा उठा सकते हैं।
  • संघ-भाजपा (RSS-BJP) की रिपोर्ट: इस आंतरिक रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि यह छात्र आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी यह व्यापक और उग्र रूप ले रहा है।

सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने का भी नहीं हुआ असर

शुरुआत में सरकार के रणनीतिकारों को लग रहा था कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हो जाएगा।

लेकिन गृह मंत्रालय की रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म होने की घोषणा का आंदोलन पर ‘कोई विशेष प्रभाव’ नहीं पड़ा। उलटा प्रदर्शन पहले से और ज्यादा तेज हो गया और देश के कई हिस्सों में फैल गया।

अलर्ट के बाद दिल्ली में ताबड़तोड़ सुरक्षा फैसले

इन गंभीर खुफिया रिपोर्टों के मिलते ही आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर ताबड़तोड़ और बड़े फैसले लिए गए:

  • राजधानी दिल्ली को छावनी में तब्दील करते हुए केंद्रीय बलों की 45 कंपनियां तैनात कर दी गईं।

  • आईबी के इनपुट के आधार पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 16 अतिरिक्त कंपनियों को विभिन्न राज्यों से तत्काल दिल्ली बुलाकर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए।

संघ प्रमुख की नसीहत और प्रधान की सफाई

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का रुख भी काफी अहम रहा। शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं, इसलिए इसे अधिक समय तक नहीं खींचा जाना चाहिए।”

हालांकि, इससे पहले गुरुवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरएसएस के कुछ बड़े नेताओं से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखने और कुर्सी बचाने की आखिरी कोशिश की थी,

लेकिन आईबी और गृह मंत्रालय की ‘रेड अलर्ट’ रिपोर्टों के सामने उनकी एक न चली और अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

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