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भारत की ऊर्जा क्रांति: 2031-32 तक 5 लाख MW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य

ऊर्जा क्रांति: 2031-32 तक 5 लाख मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य, 100% FDI को मंजूरी 

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जलवायु परिवर्तन और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच भारत सरकार गैर-पारंपरिक ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों पर तेजी से काम कर रही है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की नवीनतम ‘राष्ट्रीय विद्युत योजना’ (NEP) के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक देश की कुल संस्थापित उत्पादन क्षमता 8,73,736 मेगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।

इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की होगी, जो लगभग 5,07,411 मेगावॉट (करीब 58%) होने का लक्ष्य है।

2031-32 तक नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य (मेगावॉट में):

  • सौर ऊर्जा: 3,64,566 मेगावॉट

  • पवन ऊर्जा: 1,21,895 मेगावॉट

  • बायोमास: 15,500 मेगावॉट

  • लघु जलविद्युत: 5,450 मेगावॉट (वर्तमान स्थिति: कुल 524 गीगावॉट क्षमता में से 215.5 गीगावॉट नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हो रही है।)

सरकारी पहल और महाभियान

भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। ‘पीएम-कुसुम’, ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’, और ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ जैसी योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं।

इसके अलावा, आदिवासी बहुल इलाकों के लिए ‘पीएम जनमन’ योजना के तहत सौर ऊर्जा के विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।

विदेशी निवेश और नीतियों में बड़ी छूट

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को गति देने के लिए सरकार ने नीतियों में कई महत्वपूर्ण छूट और प्रोत्साहन दिए हैं:

  1. 100% FDI: इस क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है।

  2. ट्रांसमिशन शुल्क माफ: 30 जून 2025 तक चालू होने वाली सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय बिक्री पर 100% ट्रांसमिशन शुल्क (ISTS) माफ कर दिया गया है।

  3. लाइसेंस की जरूरत नहीं: विद्युत अधिनियम 2003 के तहत संयंत्र स्थापित करना अब गैर-लाइसेंस प्राप्त गतिविधि है। ग्रिड मानकों का पालन करने वाली कोई भी कंपनी स्टेशन स्थापित कर सकती है।

बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) पर जोर

ऊर्जा के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) पर भारी निवेश किया जा रहा है। सरकार ने VGF योजना के तहत 3,760 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिससे 13.22 गीगावॉट की परियोजनाएं चल रही हैं।

इसके अलावा 30 गीगावॉट के लिए 5,400 करोड़ रुपये की एक नई योजना को भी हाल ही में मंजूरी दी गई है।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

सौर पीवी (PV) मॉड्यूल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना लागू की गई है।

सरकार के इन सभी प्रयासों का उद्देश्य न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि भारत को ग्लोबल ग्रीन एनर्जी का हब बनाना भी है।

वर्तमान में 1,54,830 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

Santosh SETH

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