शिक्षा : ABC और APAAR से बदलेगी भारत की शिक्षा व्यवस्था
ABC और APAAR से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था, 26.30 करोड़ छात्र आईडी बनीं; जानिए कैसे मिलेगा आजीवन पढ़ाई का लाभ”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, डिजिटल और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (Academic Bank of Credits-ABC) और APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य छात्रों को आजीवन सीखने (Lifelong Learning), आसान क्रेडिट ट्रांसफर और सुरक्षित डिजिटल अकादमिक रिकॉर्ड की सुविधा उपलब्ध कराना है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 तक देशभर में 26.30 करोड़ से अधिक सत्यापित APAAR ID जारी की जा चुकी हैं, जबकि 2,963 से अधिक शैक्षणिक संस्थान अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रणाली से जुड़ चुके हैं।
क्या है Academic Bank of Credits (ABC)?
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) शिक्षा मंत्रालय की एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) संचालित करता है।
यह प्लेटफॉर्म छात्रों द्वारा विभिन्न मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से अर्जित अकादमिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने, ट्रांसफर करने और भविष्य में उपयोग करने की सुविधा प्रदान करता है।
यदि कोई छात्र किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, तो उसके अर्जित क्रेडिट सुरक्षित रहते हैं। बाद में पढ़ाई दोबारा शुरू करने पर उन्हीं क्रेडिट का उपयोग कर वह अपनी शिक्षा आगे जारी रख सकता है।
क्या है APAAR ID?
APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) एक 12 अंकों की यूनिक स्टूडेंट आईडी है, जिसे “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल के तहत विकसित किया गया है।
यह आईडी छात्र के स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, कौशल विकास कार्यक्रम और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है।
APAAR ID को डिजिलॉकर और आधार से लिंक किया जाता है तथा इसे देशभर के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी बनवाया जा सकता है।
कैसे काम करती है यह व्यवस्था?
ABC प्रणाली के तहत—
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छात्र ABC पोर्टल पर पंजीकरण कर APAAR ID प्राप्त करते हैं।
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शिक्षण संस्थान सीधे छात्रों के अकादमिक क्रेडिट पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
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छात्र विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच अपने क्रेडिट ट्रांसफर कर सकते हैं।
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सामान्यतः क्रेडिट सात वर्षों तक वैध रहते हैं।
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सभी प्रमाणपत्र और रिकॉर्ड राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (NAD) के माध्यम से सुरक्षित रखे जाते हैं।
छात्रों को क्या होंगे फायदे?
इस व्यवस्था से छात्रों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं—
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पढ़ाई बीच में रुकने पर भी क्रेडिट सुरक्षित रहेंगे।
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एक से अधिक संस्थानों में पढ़ाई संभव होगी।
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मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा।
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डिजिटल डिग्री और प्रमाणपत्र कहीं भी, कभी भी उपलब्ध।
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SWAYAM प्लेटफॉर्म से 40 प्रतिशत तक क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा।
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औपचारिक, व्यावसायिक और अनुभव आधारित शिक्षा को भी मान्यता।
मल्टीपल एंट्री-एग्जिट से मिलेगा लाभ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था के माध्यम से—
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एक वर्ष पूरा करने पर प्रमाणपत्र,
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दो वर्ष बाद डिप्लोमा,
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तीन या चार वर्ष बाद डिग्री प्राप्त की जा सकती है।
वर्तमान में 153 विश्वविद्यालय इस व्यवस्था को लागू कर चुके हैं, जिससे हजारों स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को लाभ मिल रहा है।
डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ABC और APAAR प्लेटफॉर्म अत्याधुनिक एन्क्रिप्शन एवं डिजिटल सुरक्षा तकनीकों का उपयोग करते हैं।
डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधार, डिजिलॉकर और सुरक्षित प्रमाणीकरण प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
भविष्य में ब्लॉकचेन आधारित भारत प्रमाण चेन के माध्यम से डिजिटल प्रमाणपत्रों को और अधिक सुरक्षित और छेड़छाड़-रोधी बनाने की योजना है।
डिजिटल शिक्षा की मजबूत नींव
सरकार का मानना है कि ABC और APAAR केवल डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि भविष्य की लचीली, पारदर्शी और तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव हैं।
इन पहलों से छात्रों को जीवनभर सीखने, संस्थानों के बीच आसानी से स्थानांतरण, बेहतर रोजगार अवसर और डिजिटल प्रमाणपत्रों की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध होगी।











