एलपीजी पोत 'शिवालिक' और 'नंदा देवी'

भारत की कूटनीतिक जीत: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को दिया सुरक्षित मार्ग | The Politics Again

‘भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरान ने होर्मुज से दिया सुरक्षित मार्ग, सुरक्षित निकले भारतीय एलपीजी पोत ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी ‘

नई दिल्ली (The Politics Again): श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है।

भारत की मजबूत कूटनीति रंग लाई है और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अति-संवेदनशील समुद्री मार्ग से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

इस फैसले के तुरंत बाद, भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ ने इस खतरनाक क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।

‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ की वर्तमान स्थिति

सरकारी सूत्रों से मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार, एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ अब होर्मुज से बाहर निकलकर खुले समुद्र में आ चुका है।

  • वर्तमान में यह जहाज भारतीय नौसेना की कड़ी निगरानी और सुरक्षा घेरे में आगे बढ़ रहा है।
  • अगले दो दिनों में इसके भारत पहुंचने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही है कि 21 मार्च तक यह पोत मुंबई या कांडला बंदरगाह पर सुरक्षित लंगर डाल देगा।
  • इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण एलपीजी पोत ‘नंदा देवी’ भी इस संवेदनशील मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है, जिससे देश में गैस आपूर्ति की चिंताओं को बड़ा विराम मिला है।

PM मोदी की कूटनीति का दिखा सीधा असर

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जहाजों की यह सुरक्षित वापसी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय वार्ता का परिणाम है। इस चर्चा में ऊर्जा आपूर्ति के सुचारु प्रवाह पर विशेष जोर दिया गया था।

शुक्रवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने इसके स्पष्ट संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था, “भारत ईरान का एक अभिन्न मित्र है। दोनों देशों के साझा हित हैं और भारत सरकार ने युद्ध के बाद कई क्षेत्रों में ईरान का सहयोग किया है।” इससे पूर्व, ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने भी तेहरान द्वारा कुछ मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की पुष्टि की थी।

ईरान का रुख: “हम होर्मुज बंद नहीं करना चाहते”

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान ने कभी भी इस जलडमरूमध्य को बंद करने की मंशा नहीं रखी है।

यह मार्ग खुला है, लेकिन युद्ध की परिस्थितियों के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है। उन्होंने वैश्विक नेताओं से अपील की है कि वे युद्ध रोकने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाएं, क्योंकि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यहां हल्की सी रुकावट भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भूचाल ला सकती है।

खाड़ी में भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति: एक नज़र में

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है:

  • सक्रिय जहाज: वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 24 जहाज संचालित हो रहे हैं, जिन पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं।

  • होर्मुज के पास स्थिति: होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में मौजूद 3 जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी डीजी शिपिंग द्वारा 24×7 सक्रिय निगरानी की जा रही है।

  • कंट्रोल रूम की मुस्तैदी: मंत्रालय के नियंत्रण कक्ष ने अब तक 2,425 कॉल और 4,441 ईमेल हैंडल किए हैं तथा 223 से अधिक फंसे हुए नाविकों की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की है।

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