India UK Critical Minerals GSCO

भारत-ब्रिटेन महत्वपूर्ण खनिज वेधशाला का शुभारंभ

भारत-ब्रिटेन ने किया ‘महत्वपूर्ण खनिज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला’ का शुभारंभ, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक को मिलेगी नई रफ्तार”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं और भविष्य की तकनीकों को सुरक्षित करने की दिशा में भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने एक बड़ा कदम उठाया है।

नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी तथा ब्रिटेन की विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों की राज्य सचिव यवेट कूपर ने संयुक्त रूप से ‘भारत-ब्रिटेन महत्वपूर्ण खनिज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला (GSCO)’ का औपचारिक शुभारंभ किया।

‘The Politics Again’ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) के लिए आवश्यक खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं महत्वपूर्ण खनिज

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) आज की रणनीतिक और आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ हैं।

उन्होंने कहा कि यह वेधशाला (Observatory) भारत की साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण क्षमताओं को मजबूत करेगी और ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM)’ के उद्देश्यों को तेजी से आगे बढ़ाएगी।

यह कदम लचीली और विविध मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

दोनों देशों के पारस्परिक हित में है यह साझेदारी

ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर (जो लेबर पार्टी की सांसद भी हैं) ने भारत-ब्रिटेन के इस बढ़ते सहयोग की सराहना की।

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों तक बेहतर पहुंच और सटीक सूचनाओं का साझाकरण दोनों देशों के हित में है।

यह साझेदारी आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के साथ-साथ रणनीतिक उद्योगों में व्यापक सहयोग की मजबूत नींव रखेगी।

IIT धनबाद और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की संयुक्त पहल

GSCO केवल एक सरकारी पहल नहीं है, बल्कि यह उच्चस्तरीय अकादमिक और तकनीकी सहयोग का भी परिणाम है।

यह वेधशाला ‘टेक्समिन’ (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – ISM धनबाद) और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक संयुक्त पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य एक डेटा-संचालित (Data-driven) मंच तैयार करना है।

वेधशाला के मुख्य कार्य:

  • वैश्विक महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतर निगरानी करना।

  • भविष्य में आपूर्ति से जुड़े जोखिमों और व्यवधानों की समय रहते पहचान करना।

  • बाजार की सटीक जानकारी जुटाकर नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शोधकर्ताओं को निर्णय लेने में सक्षम बनाना।

कैसे पड़ी इस साझेदारी की नींव?

इस महत्वपूर्ण पहल की घोषणा सबसे पहले अक्टूबर 2025 में भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक के दौरान की गई थी।

इसके बाद, मार्च 2026 में दोनों देशों के बीच हुए एक अनुसंधान सहयोग समझौते के माध्यम से इसे औपचारिक रूप दिया गया।

इस कार्यक्रम में दोनों देशों के मंत्रालयों, उच्चायोगों, उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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