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रूस से तेल खरीद पर भारत सख्त, अमेरिका को दो टूक

रूस से तेल खरीद पर भारत की अमेरिका को दो टूक : ‘राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं, किसी बाहरी दबाव में नहीं लेंगे फैसला’

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

रूस-यूक्रेन महायुद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और तेल की राजनीति गरमाई हुई है। अमेरिका लगातार दुनिया भर के देशों पर रूस से दूरी बनाने और व्यापारिक संबंध खत्म करने का दबाव बना रहा है।

लेकिन, भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश और ऊर्जा नीति का लोहा मनवाते हुए दुनिया को साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के खत्म होने के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद जारी रखने का स्पष्ट संदेश दिया है।

भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि तेल खरीद का फैसला पूरी तरह से व्यावसायिक जरूरतों पर आधारित है और इस पर किसी बाहरी दबाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।

‘व्यापारिक फायदों और जरूरतों पर लेते हैं फैसला’

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है।

  • उन्होंने कहा कि भारत की रूसी तेल खरीद कभी भी ‘अमेरिकी छूट’ पर निर्भर नहीं रही है।

  • भारत अपनी तेल खरीद का फैसला पूरी तरह से कमर्शियल (व्यापारिक) फायदों और देश की ऊर्जा जरूरतों के आधार पर लेता है।

  • उन्होंने आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और भारतीय रिफाइनरियां हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अमेरिकी छूट खत्म, लेकिन भारत की सप्लाई पर असर नहीं

गौरतलब है कि अमेरिका ने रूस से जुड़े कुछ तेल कारोबार के लिए अस्थायी छूट दी थी, जिसकी समय-सीमा अब खत्म हो चुकी है।

हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने साफ किया है कि इससे भारत की ऑयल सप्लाई चैन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को रूस से रियायती दरों (Discounted Price) पर कच्चा तेल मिल रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी फायदा हुआ है।

यही मुख्य वजह है कि भारत बिना किसी दबाव में आए इस खरीद को जारी रखना चाहता है।

रूस बना भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर

वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके जवाब में रूस ने एशियाई देशों की ओर रुख किया और सस्ते दाम पर तेल बेचना शुरू किया।

  • भारत ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए इस मौके का फायदा उठाया और बड़ी मात्रा में रूसी तेल का आयात शुरू कर दिया।

  • ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, मई महीने में भारत का रूसी तेल आयात करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है, जो अब तक के रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब माना जा रहा है।

भारतीय रिफाइनरियां पूरी तरह तैयार, कई विकल्प मौजूद

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ऊर्जा के मामले में सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है। भारत के पास अमेरिका, UAE, ओमान और इराक जैसे देशों से भी पर्याप्त तेल सप्लाई के मजबूत विकल्प मौजूद हैं।

इसके अलावा, घरेलू मांग में थोड़ी नरमी और स्पॉट मार्केट में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ने के कारण देश में फिलहाल किसी भी तरह के ऊर्जा संकट की आशंका नहीं है।

भारत की यह रणनीति उसे ऊर्जा के मोर्चे पर पूरी तरह से सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाती है।

Santosh SETH

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