Akhil Bharatiya Brahman Mahasabha workers protesting and handing over a memorandum to the City Magistrate against SP MLA Toofani Saroj in Jaunpur

जौनपुर: ‘जनेऊ’ पर सपा विधायक तूफानी सरोज की टिप्पणी से मचा बवाल

जौनपुर में सपा विधायक तूफानी सरोज के खिलाफ फूटा ब्राह्मण समाज का गुस्सा: ‘जनेऊ’ और पुजारियों पर अभद्र टिप्पणी को लेकर FIR की मांग”

जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट 

समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक तूफानी सरोज द्वारा ‘जनेऊ’ और ब्राह्मण समाज पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर जिले में सियासी और सामाजिक उबाल आ गया है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (राष्ट्रीय) के कार्यकर्ताओं ने बुधवार सुबह 11:30 बजे जौनपुर में जोरदार प्रदर्शन किया।

जिलाध्यक्ष रत्नाकर चौबे के नेतृत्व में महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह को जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा,

जिसमें सपा विधायक के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

‘जनेऊ का उपहास करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात’

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष रत्नाकर चौबे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विधायक तूफानी सरोज ने एक सार्वजनिक मंच से ‘जनेऊ’ (यज्ञोपवीत) का उपहास उड़ाते हुए बेहद अमर्यादित टिप्पणी की है।

इसके साथ ही उन्होंने पंडा-पुजारियों और संपूर्ण ब्राह्मण समाज के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

चौबे ने स्पष्ट किया कि जनेऊ सनातन धर्म का एक बेहद पवित्र प्रतीक है। एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि द्वारा इसका इस तरह सार्वजनिक उपहास उड़ाना करोड़ों सनातनी नागरिकों की धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार है।

महासभा ने इस बयान को जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और समाज में वैमनस्य फैलाने का कुत्सित प्रयास करार दिया है।

मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के माध्यम से ब्राह्मण महासभा ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर प्रकरण की त्वरित जांच कराई जाए और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में दोषी विधायक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक व विधिक कार्रवाई (FIR) सुनिश्चित की जाए।

महासभा ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि या व्यक्ति सनातन संस्कृति और ब्राह्मण समाज का अपमान करने का दुस्साहस न कर सके।

संगठन ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।