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INCOIS का अल नीनो बुलेटिन: समुद्री क्षेत्रों के लिए चेतावनी

समुद्री सुरक्षा पर INCOIS का बड़ा अलर्ट: अल नीनो से उबलेगा समंदर, मछलियों और प्रवाल भित्तियों पर मंडराया संकट”

हैदराबाद/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय समुद्री क्षेत्रों और तटीय इलाकों पर ‘अल नीनो’ (El Nino) के संभावित और खतरनाक प्रभावों को देखते हुए, आईएनसीओआईएस (INCOIS – भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र) ने अपनी तरह का पहला विशेष ‘अल नीनो बुलेटिन’ जारी किया है।

22 जून 2026 को चेवेल्ला संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी गारू ने INCOIS मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस बुलेटिन का विमोचन किया।

इस बुलेटिन ने समुद्री परितंत्र, तटीय कटाव और बढ़ते तापमान को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

सर्दियों में चरम पर होगा अल नीनो का कहर

इस विशेष बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि अल नीनो की घटना लगातार और तेजी से विकसित हो रही है।

अनुमान है कि आगामी सर्दियों के मौसम (नवंबर 2026 से जनवरी 2027) में यह अपने चरम पर पहुंच जाएगी।

इसके प्रभाव से हिंद महासागर की सतह का तापमान अप्रैल और मई 2027 तक सामान्य से काफी अधिक बना रहेगा।

विशेषकर मार्च से मई 2027 के बीच उत्तरी हिंद महासागर (जिसमें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों शामिल हैं) का समुद्री परितंत्र भयंकर ऊष्मीय दबाव (Heat Stress) से गुजरेगा।

समुद्री जीवों पर सीधा प्रहार: मछलियां और मूंगा चट्टानें खतरे में

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का यह बढ़ता तापमान जलीय जीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। बुलेटिन में कई प्रमुख पारिस्थितिक खतरों को रेखांकित किया गया है:

  • प्रवाल भित्तियों का विरंजन (Coral Bleaching): तापमान बढ़ने से मूंगा चट्टानों के रंग उड़ने और उनके मरने की घटनाएं तेजी से बढ़ेंगी।
  • मछली पकड़ने के उद्योग को झटका: सार्डिन और मैकेरल जैसी प्रमुख मछलियों की संख्या में भारी कमी आ सकती है। मछलियां ठंडे पानी की तलाश में अन्य आवासों की ओर पलायन कर सकती हैं।
  • प्रजनन और विकास पर असर: अल नीनो के कारण समुद्र के बदलते पर्यावरण से मछलियों की प्रजनन क्षमता घटेगी और वे अपना उचित आकार (Stunted Growth) नहीं ले पाएंगी।

बंगाल की खाड़ी में तबाही, अरब सागर रहेगा शांत

INCOIS के बुलेटिन ने भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के लिए अलग-अलग पूर्वानुमान जारी किए हैं:

  • बंगाल की खाड़ी (पूर्वी तट): मौजूदा मानसून के मौसम में यहां समुद्र की स्थिति बेहद अशांत रहने की आशंका है। इसके चलते भारत के पूर्वी तटों पर बाढ़ और तटीय कटाव की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
  • अरब सागर (पश्चिमी तट): इसके विपरीत, अरब सागर और पश्चिमी तट पर समुद्र की स्थिति सामान्य से शांत रहने का अनुमान है।
  • इससे समुद्री संचालकों को काम करने के लिए अधिक अनुकूल अवसर मिलेंगे और तटीय जलभराव की समस्या कम होगी।

समुद्री संचालकों के लिए एडवाइजरी

INCOIS ने सभी मछुआरों, नौवहन कंपनियों और समुद्री संचालकों से अपील की है कि वे समय-समय पर जारी किए जाने वाले अलर्ट, चेतावनियों और सलाहों का सख्ती से पालन करें।

बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए INCOIS अपना अगला विशेष अल नीनो बुलेटिन जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में जारी करेगा।

Santosh SETH

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