Strait of Hormuz conflict impact on India in Hindi
“होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराया युद्ध का साया: वैश्विक तेल आपूर्ति ठप, भारत के लिए क्या हैं विकल्प और चुनौतियां ?
नई दिल्ली : शिल्पा की रिपोर्ट
ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माने जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से तेल और गैस के प्रवाह को बुरी तरह बाधित कर दिया है।
इज़राइल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने इस अहम समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
इसके परिणामस्वरूप दुनियाभर में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ना तय है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
वैश्विक महत्व: अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन चोकपॉइंट है।
भौगोलिक स्थिति: अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह केवल 33 किमी (21 मील) चौड़ा है। शिपिंग लेन और भी संकरी होने के कारण यह हमलों और नाकाबंदी के प्रति बेहद संवेदनशील है।
वर्तमान स्थिति: जहाजों की आवाजाही पर ब्रेक
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) द्वारा कथित तौर पर जलमार्ग बंद करने के संदेशों के बाद दहशत का माहौल है।
हालांकि तेहरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा के डर से बड़ी व्यापारिक और बीमा कंपनियों ने इस मार्ग से माल ढुलाई रोक दी है। सैकड़ों तेल टैंकरों ने खाड़ी के खुले पानी में लंगर डाल दिया है।
ऐतिहासिक संदर्भ: 1980 से 1988 के बीच चले ईरान-इराक ‘टैंकर युद्ध’ और 2019 में अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान भी इस जलडमरूमध्य को कभी पूरी तरह से बंद नहीं किया गया था। मौजूदा हालात को ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व माना जा रहा है।
भारत पर प्रभाव: कच्चे तेल में राहत, लेकिन LPG-LNG में बड़ी चुनौती
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का 88% से अधिक आयात करता है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की स्थिति: भारत के पास कच्चे तेल का 10 दिनों से अधिक का भंडार और एक सप्ताह का ईंधन स्टॉक मौजूद है। संकट की स्थिति में भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (SPR) का उपयोग कर सकता है।
इसके अलावा, भारत गैर-होर्मुज क्षेत्रों (रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) से अपनी आपूर्ति बढ़ा सकता है।
LPG और LNG की चिंताजनक स्थिति: भारत के लिए सबसे बड़ी कमज़ोरी गैस आयात है। देश अपनी LPG जरूरतों का 80-85% और LNG का लगभग 60% आयात करता है, जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है और इसी जलमार्ग से गुजरता है।
कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास गैस का कोई बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत में गैस की किल्लत हो सकती है।
कीमतों में भारी उछाल और आर्थिक प्रभाव
क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के चलते तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं।
ब्रेंट क्रूड का हाल: शुरुआती एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.5% की छलांग के साथ $82 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और बाद में $77.5 पर स्थिर हुईं।
भारत का आयात बिल: अर्थशास्त्रियों के अनुसार, तेल की कीमतों में $1 प्रति बैरल की वृद्धि होने से भारत के वार्षिक तेल आयात बिल पर $1.8 से $2 अरब का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इससे देश में महंगाई बढ़ने की भी आशंका है।
भारत सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
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