Rupee falls to record low

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले ₹92 के पार, जानें कारण

“रुपये में ऐतिहासिक गिरावट : डॉलर के मुकाबले पहली बार ₹92 के पार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई भारत की टेंशन “

नई दिल्ली ” द पॉलिटिक्स अगेन ” संतोष सेठ की रिपोर्ट  

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग ने भारतीय मुद्रा को अब तक के सबसे बुरे दौर में धकेल दिया है।

बुधवार सुबह भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹92.17 के सर्वकालिक निचले स्तर (Record Low) पर जा गिरा।

सुबह 10:40 बजे तक रुपये ने पहली बार ₹92 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई और आयात बिल को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया भारी दबाव

रुपये की इस ऐतिहासिक कमज़ोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराता तनाव है।

इस तनाव के चलते ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है, जिससे कीमतों में भारी उछाल आया है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात (Import) करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल का महंगा होना सीधे तौर पर देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ाता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ता है और करेंसी कमज़ोर होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक अधिक रहीं, तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) भी बढ़ सकता है।

मज़बूत डॉलर और निवेशकों का ‘सेफ-हेवन’ की ओर रुख

रुपये में इस गिरावट का दूसरा अहम कारण अमेरिकी डॉलर का अन्य ग्लोबल करेंसी के मुकाबले मज़बूत होना है।

बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और अनिश्चितता के बीच दुनिया भर के निवेशक तेज़ी से डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड को ‘सेफ़-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर देख रहे हैं।

जब जोखिम से बचने की यह प्रवृत्ति बढ़ती है, तो उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पूंजी तेजी से बाहर निकलने लगती है, जिसका सीधा असर रुपये जैसी करेंसी पर पड़ता है।

ग्लोबल मार्केट में हड़कंप का असर

रुपये की यह चाल ग्लोबल फ़ाइनेंशियल मार्केट में मचे बड़े उतार-चढ़ाव का ही रिफ्लेक्शन है। वॉल स्ट्रीट में गिरावट के बाद एशियाई इक्विटी मार्केट में भी तेजी से बिकवाली देखी गई है।

करेंसी मार्केट विशेष रूप से उन भू-राजनीतिक झटकों पर तेज़ी से रिएक्ट करते हैं जो तेल उत्पादक क्षेत्रों से जुड़े होते हैं।

अब बाजार विशेषज्ञों की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगे।

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