नेपाल के बीरगंज में भारी तनाव : हिंदुओं पर पत्थरबाजी के बाद कर्फ्यू

“बांग्लादेश के बाद अब पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल से भी सांप्रदायिक तनाव की चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। भारत की सीमा से सटे नेपाल के प्रमुख व्यापारिक शहर बीरगंज में हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि प्रशासन को अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा है”

बीरगंज (नेपाल)/रक्सौल 07 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज में उपद्रवियों को छतों से पत्थर बरसाते और आगजनी करते देखा गया है, जिसने सीमावर्ती इलाकों में दहशत पैदा कर दी है।

विवाद की जड़: एक टिकटॉक वीडियो और भड़की चिंगारी

घटना की शुरुआत एक सोशल मीडिया वीडियो (टिकटॉक) से हुई, जिसमें एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया। यह वीडियो देखते ही देखते जंगल की आग की तरह फैल गया।

आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आई और जल्द ही विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। दुकानों में तोड़फोड़ की गई, सड़कों पर टायर जलाए गए और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

बीरगंज बना रणक्षेत्र: छतों से बरसे पत्थर

बीरगंज के कई इलाकों में स्थिति तब और भयावह हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत हुई। वायरल फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि उपद्रवी अपने घरों की छतों से सुरक्षाबलों और अन्य नागरिकों पर पत्थरबाजी कर रहे हैं।

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहले आंशिक और फिर पूर्ण कर्फ्यू लागू कर दिया। संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में नेपाली पुलिस और सशस्त्र बल (APF) तैनात किए गए हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ी

बीरगंज भारत के रक्सौल (बिहार) बॉर्डर के बेहद करीब है, जिस कारण भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हैं।

  • बॉर्डर अलर्ट: सीमा पर एसएसबी (SSB) ने गश्त बढ़ा दी है।

  • आवाजाही पर असर: कर्फ्यू के कारण सीमा पार से होने वाला व्यापार और आम लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

  • अधिकारियों का संपर्क: दोनों देशों के सीमावर्ती अधिकारी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं ताकि हिंसा की आग भारतीय क्षेत्रों तक न पहुंचे।

हिंदू राष्ट्र से धर्मनिरपेक्षता तक का सफर और सामाजिक दरार

जानकारों का मानना है कि नेपाल में हो रही ये घटनाएं उस गहरी बेचैनी का नतीजा हैं जो राजशाही के अंत और नेपाल के ‘हिंदू राष्ट्र’ से ‘धर्मनिरपेक्ष गणराज्य’ बनने के बाद पैदा हुई है।

बीरगंज की हिंसा यह दर्शाती है कि अब धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया संवाद के बजाय नफरत फैलाने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।

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