चांदी आयात पर सरकार सख्त, ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाला
चांदी आयात पर सरकार का बड़ा प्रहार: ‘फ्री’ से ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाला, अब मंगाने के लिए लेना होगा सरकारी लाइसेंस”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
कीमती धातुओं के व्यापार और घरेलू बाजार को लेकर भारत सरकार ने एक और बहुत बड़ा और सख्त आर्थिक फैसला लिया है।
सरकार ने तत्काल प्रभाव से चांदी के आयात (Silver Import) से जुड़े नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है।
अब देश में चांदी का आयात आसानी से नहीं किया जा सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी नई अधिसूचना के मुताबिक, चांदी की आयात नीति को ‘मुक्त’ (Free) श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ (Restricted) श्रेणी में डाल दिया गया है।
क्या है इस ‘प्रतिबंध’ का असली मतलब?
इस बड़े बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि अब आयातकों को देश में चांदी मंगाने के लिए सरकार से ‘लाइसेंस’ (अनुमति) लेना अनिवार्य होगा।
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क्या-क्या हुआ प्रतिबंधित: इस प्रतिबंधित श्रेणी में केवल सादी चांदी ही नहीं, बल्कि सोने और प्लैटिनम की परत चढ़ी हुई (Clad with Gold/Platinum) चांदी को भी शामिल किया गया है।
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जटिल होगी प्रक्रिया: पहले मुक्त श्रेणी में होने के कारण चांदी का आयात बेहद आसान था, लेकिन अब लाइसेंसिंग प्रक्रिया के कारण यह पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा और आयात प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
दोहरे झटके: पहले बढ़ाया गया था 15% आयात शुल्क
चांदी आयातकों के लिए यह कुछ ही दिनों के भीतर सरकार की तरफ से दूसरा बड़ा झटका है। इससे ठीक पहले 13 मई को सरकार ने कीमती धातुओं (सोने-चांदी) पर आयात शुल्क (Customs Duty) में भारी इजाफा किया था।
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सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया था।
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टैक्स में इस भारी वृद्धि के तुरंत बाद अब आयात को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डालने से देश में चांदी का आयात काफी महंगा हो जाएगा।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
आर्थिक जानकारों का मानना है कि आयात शुल्क में भारी वृद्धि और लाइसेंस की अनिवार्यता के इस ‘डबल एक्शन’ से देश में व्यापार संतुलन (Trade Balance) को साधने में मदद मिलेगी।
हालांकि, आयात महंगा और सीमित होने से घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर सर्राफा बाजार और आभूषण (Jewellery) उद्योग पर पड़ेगा।











