Gorakshpeeth Social Harmony Seminar

सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका अहम, 22 विभूतियां सम्मानित

सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका अहम: महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में 22 विभूतियां सम्मानित; मंत्री गिरीश यादव बोले- ‘गोरक्षपीठ ने जो कहा, वो किया’

जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन 

राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पावन स्मृति में “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी और ‘समरसता सम्मान समारोह’ का आयोजन कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ।

ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर वक्ताओं ने गहन विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 22 विशिष्ट लोगों को “समरसता सम्मान” से नवाजा गया।

गोरक्षपीठ ने जो संदेश दिया, उसे व्यवहार में भी उतारा: मंत्री गिरीश यादव

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गिरीश चंद्र यादव ने गोरक्षपीठ के योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा,

“गोरखपुर का गोरक्षपीठ आध्यात्मिक दृष्टि से एक प्रमुख केंद्र है और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गोरक्षपीठ ने सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, उसे सिर्फ उपदेशों तक सीमित न रखकर व्यवहार में भी उतारा है।”

देश की रक्षा के लिए संतों ने उठाए शस्त्र: एमएलसी बृजेश सिंह

मा0 विधान परिषद सदस्य (MLC) श्री बृजेश सिंह ‘प्रिंसू’ ने अपने संबोधन में कहा कि गोरक्षपीठ ने समय-समय पर सनातन धर्म को मजबूत करने के साथ ही समाज में समरसता कायम करने का निरंतर कार्य किया है।

  • सीएम योगी की तारीफ: उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि सीएम योगी ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का शानदार कार्य किया है।

  • उन्होंने आह्वान किया कि लोगों को समाज तोड़ने वाली शक्तियों का विरोध और जोड़ने वाली चेतना का समर्थन करना चाहिए।

‘जातियों में बंटे समाज को जोड़ने के लिए खोजने होंगे नए सूत्र’

संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक रामशीष ने मौजूदा सामाजिक चुनौतियों पर बेबाक राय रखी।

  • उन्होंने कहा कि चार वर्णों से बढ़कर आज हजारों जातियों में बंटे समाज को फिर से जोड़ने के लिए समयानुकूल नए सूत्र खोजने होंगे।

  • भारत के दर्शन को उच्च बताते हुए उन्होंने चिंता जताई कि संतों द्वारा दिया गया ‘एक-दूसरे में ईश्वर देखने’ का संदेश कमजोर पड़ रहा है और देश को षड्यंत्रपूर्वक तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

समरसता के बिना भारत का विश्वगुरु बनना संभव नहीं

पूर्व सांसद एवं पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि भगवान राम और कृष्ण ने सभी वर्गों को अपनाया था, लेकिन आज लोग सनातन धर्म की मूल भावना को भूलकर केवल परिवार तक सीमित हो रहे हैं। सामाजिक समरसता के बिना भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता।

वहीं, गुरु रविदास जन्मस्थान (वाराणसी) के आचार्य भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि ‘तेरे-मेरे’ की भावना से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण करना होगा।

बारीनाथ मठ के महंत योगी हरदेवनाथ जी महाराज ने समरसता का अर्थ ‘त्याग और अपनत्व’ बताते हुए वंचित वर्गों को गले लगाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने किया और संचालन श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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