यूपी: तीन तलाक और एसिड अटैक सर्वाइवर्स को मुफ्त घर और इलाज
यूपी: तीन तलाक पीड़ित और एसिड अटैक सर्वाइवर्स को मुफ्त घर और इलाज देगी योगी सरकार; CM ने विकास कार्यों पर भी दिए सख्त निर्देश”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : सन्तोष सेठ की रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार आधी आबादी (महिलाओं) की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए एक अभूतपूर्व कल्याणकारी खाका तैयार कर रही है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने समाज की सबसे ज़रूरतमंद और पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए एक विशेष योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
इसके अलावा, सीएम योगी ने राज्य में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर भी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।
🛡️ महिलाओं के लिए ‘सुरक्षा और सम्मान’ की नई पहल
इस संवेदनशील पहल के तहत पात्र पीड़ित महिलाओं को न केवल सुरक्षित छत (आवास) मुहैया कराई जाएगी, बल्कि उनके संपूर्ण इलाज और स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार उठाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसके लिए लाभार्थियों का डेटा इकट्ठा करने और उसकी पुष्टि करने का काम बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है।
इन 3 श्रेणियों की महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता:
अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष योजना का लाभ मुख्य रूप से तीन श्रेणियों की महिलाओं को दिया जाएगा:
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तीन तलाक (Triple Talaq) से प्रभावित महिलाएं
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एसिड अटैक (Acid Attack) की शिकार (सर्वाइवर्स)
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बेसहारा या परित्यक्त (Abandoned) महिलाएं
क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
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आवास (घर): पात्र महिलाओं को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत सुरक्षित घर दिया जाएगा।
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मुफ्त इलाज: इन महिलाओं को ‘आयुष्मान भारत’ और ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना’ जैसे प्रमुख स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
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अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को लंबे समय तक स्थिरता देकर उन्हें सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जीने के योग्य बनाना है।
🚧 विकास कार्यों पर CM योगी के सख्त निर्देश: ‘समय और गुणवत्ता से समझौता नहीं’
महिलाओं के कल्याण के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के बुनियादी ढांचे को लेकर भी एक अहम बैठक की।
लोक निर्माण विभाग (PWD) की 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों (DMs), मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिए:
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स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रस्ताव: सभी विकास प्रस्ताव स्थानीय लोगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर सावधानीपूर्वक तैयार किए जाने चाहिए।
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एक हफ्ते का अल्टीमेटम: सीएम ने जिलाधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक हफ्ते के भीतर जिलेवार प्रस्ताव जमा करने का निर्देश दिया, ताकि जून के पहले हफ्ते तक कार्ययोजना को मंजूरी दी जा सके।
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अधिकारियों और ठेकेदारों की तय होगी जवाबदेही: मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विभागीय अधिकारियों या ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से होने वाली किसी भी देरी या गड़बड़ी के लिए जन-प्रतिनिधियों (विधायकों/सांसदों) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।
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प्रोजेक्ट समय पर और अच्छी क्वालिटी के साथ पूरे हों, यह सुनिश्चित करना सीधे तौर पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।











