यूपी 2027 की किलेबंदी: योगी की नई टीम और हिंदू वोट का फॉर्मूला
यूपी 2027 का शंखनाद: योगी की ‘किलेबंदी’ बनाम अखिलेश का ‘PDA’; जानिए मंत्रिमंडल विस्तार के पीछे का असली खेल”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। एक तरफ जहां 22 मई से राज्य में जाति जनगणना की सुगबुगाहट है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से ‘विसात’ बिछा दी है।
रविवार (10 मई) को हुए कैबिनेट विस्तार के जरिए सीएम योगी ने अपने ‘हिंदू वोट’ के फॉर्मूले को जातिगत समीकरणों की चाशनी में डुबोकर विरोधियों को पैनिक मोड में डाल दिया है।
योगी की ‘टीम-6’: जातियों का सॉलिड जोड़
योगी मंत्रिमंडल में शामिल 6 नए चेहरों और 2 प्रमोशन के जरिए भाजपा ने ब्राह्मण, ओबीसी और दलित समाज को साधने की बड़ी कोशिश की है।
| मंत्री का नाम | वर्ग/जाति | राजनीतिक महत्व/क्षेत्र |
| मनोज पाण्डेय | ब्राह्मण | रायबरेली/अवध (सपा के पूर्व कद्दावर नेता) |
| भूपेंद्र चौधरी | जाट (OBC) | पश्चिम यूपी (जाटों की बड़ी पकड़) |
| कैलाश राजपूत | पिछड़ा वर्ग (OBC) | लखीमपुर/तराई क्षेत्र |
| हंसराज विश्वकर्मा | पिछड़ा वर्ग (OBC) | वाराणसी/पूर्वांचल |
| कृष्णा पासवान | दलित | फतेहपुर/बुंदेलखंड-मध्य यूपी |
| सुरेंद्र दिलेर | दलित | हाथरस/ब्रज क्षेत्र |
नोट: अजित सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन यह दर्शाता है कि सरकार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले पिछड़ा वर्ग के युवाओं पर भरोसा जता रही है।
रणनीति: मंडल + कमंडल + लॉ एंड ऑर्डर
यूपी इकलौता ऐसा राज्य है जहां धर्म (कमंडल) और जाति (मंडल) दोनों का सिक्का चलता है। सीएम योगी ने अपनी नई रणनीति में तीन स्तंभ खड़े किए हैं:
धर्म: शपथ ग्रहण के दौरान मंत्रियों के गले में ‘जय श्री राम’ और ‘राधे-राधे’ के पटके स्पष्ट संदेश थे कि भाजपा अपनी मूल विचारधारा से पीछे नहीं हटेगी।
जाति: 2027 में 233 ऐसी सीटें हैं जहां हिंदू वोट निर्णायक हैं। योगी ने पंडित, विश्वकर्मा, दलित, जाट और लोधी समाज को जोड़कर एक अटूट ‘हिंदू वोट बैंक’ तैयार करने की कोशिश की है।
लॉ एंड ऑर्डर: “ना कर्फ्यू… ना माफिया… ना दंगा… सब चंगा” का नारा योगी की सबसे बड़ी यूएसपी बनी हुई है।
अखिलेश यादव का पैनिक मोड: एक्स (X) पर ‘पर्ची’ और ‘तंज’
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के लिए 2027 का चुनाव उनकी सियासत और विरासत दोनों की आखिरी उम्मीद है।
2017 और 2022 की हार के बाद, वे ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और ‘जाति जनगणना’ के सहारे वापसी की राह देख रहे हैं।
खीझ या रणनीति? मंत्रिमंडल विस्तार पर अखिलेश यादव का सोशल मीडिया पर ‘दिल्ली की पर्ची’ वाला तंज उनकी घबराहट को दर्शाता है।
मुस्लिम फैक्टर: अखिलेश की नजर यूपी की उन 143 सीटों पर है जहां मुस्लिम मतदाता प्रभावी हैं और 73 सीटें ऐसी हैं जहां आबादी 30% से अधिक है। वे 2024 के MY+ फॉर्मूले को ही रिपीट करने की तैयारी में हैं।
उपमुख्यमंत्री का हमला
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश की हताशा पर तंज कसते हुए कहा, “अखिलेश यादव अब 2047 तक इंतजार करें, क्योंकि बंगाल में कमल खिलने के बाद अब यूपी में विपक्ष के पास कोई जगह नहीं बची है।”
फ्लाइट छोड़ ट्रेन पकड़ेंगे लोग: मुंबई-पुणे 28 मिनट, दिल्ली-लखनऊ 2 घंटे; रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव…
क्या फिर से लागू होगा Work From Home? जानिए PM मोदी ने क्यों की 1…
पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सिंदूर' का खौफ: जैश के आतंकियों ने खुद कबूली हार, बोले- 'उस…
सोमनाथ में पीएम मोदी की हुंकार: '1951 में प्राण-प्रतिष्ठा ने किया था स्वतंत्र चेतना का…
पीएम मोदी की अपील का 'दलाल स्ट्रीट' पर असर: धड़ाम हुए ज्यूलरी स्टॉक्स, टाइटन और…
बंगाल में 'डबल इंजन' सरकार का एक्शन शुरू: CM शुभेंदु की पहली कैबिनेट में बड़े…