महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: वैचारिक मतभेद के कारण BJP ने तोड़े अकोट और अंबरनाथ के विवादित गठबंधन

“महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने अकोट और अंबरनाथ में स्थानीय स्तर पर किए गए ‘अस्वाभाविक’ गठबंधनों को सिरे से खारिज कर दिया”

मुंबई/अकोला 07 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सत्ता के लिए विचारधारा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।

अकोट में AIMIM के साथ ‘बेमेल’ गठबंधन और कड़ा एक्शन

अकोला जिले के अकोट में स्थानीय निकाय के समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी की स्थानीय इकाई ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ हाथ मिलाया था। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, राजनीतिक हलकों में बीजेपी की तीखी आलोचना शुरू हो गई।

  • विधायक को नोटिस: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस गठबंधन को अनुशासनहीनता मानते हुए स्थानीय विधायक प्रकाश भरसखाले को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

  • फडणवीस की चेतावनी: उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त लहजे में कहा, “AIMIM के साथ गठबंधन का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। अगर किसी ने निजी स्वार्थ के लिए यह निर्णय लिया है, तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

अंबरनाथ: अपनी ही सहयोगी ‘शिंदे सेना’ को दरकिनार कर कांग्रेस से हाथ मिलाया

ठाणे जिले के अंबरनाथ में स्थिति और भी ज्यादा विवादास्पद रही। यहाँ बीजेपी ने अपनी महायुति सहयोगी (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना) को हराने के लिए धुर विरोधी कांग्रेस और अजीत पवार की NCP के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बना ली।

सत्ता का खेल और आंकड़ों का गणित:

60 सीटों वाली अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत के लिए 31 सीटों की आवश्यकता थी।

  • शिंदे सेना: 27 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर)

  • बीजेपी (14) + कांग्रेस (12) + NCP (4) + निर्दलीय (2) = 32 सीटें

इस गठबंधन के जरिए बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिंदे सेना की उम्मीदवार को हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा तो कर लिया, लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस जीत को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए तुरंत गठबंधन खत्म करने के निर्देश दिए हैं।

नेतृत्व का स्पष्ट संदेश: विचारधारा सर्वोपरि

बीजेपी आलाकमान के इस हस्तक्षेप ने यह साफ कर दिया है कि भले ही स्थानीय स्तर पर सत्ता हाथ से चली जाए, लेकिन पार्टी कांग्रेस और AIMIM जैसे दलों के साथ मंच साझा नहीं करेगी। फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों में गठबंधन का निर्णय प्रदेश स्तर की अनुमति के बिना लेना “अनुशासन का उल्लंघन” है।

प्रमुख घटनाक्रम एक नज़र में:

स्थान विवादित गठबंधन नेतृत्व की प्रतिक्रिया
अकोट BJP + AIMIM गठबंधन तत्काल भंग, विधायक प्रकाश भरसखाले को नोटिस।
अंबरनाथ BJP + कांग्रेस + NCP (अजीत) जीत के बावजूद गठबंधन खत्म करने और शिंदे सेना के साथ रहने का निर्देश।

आगे क्या?

बीजेपी के इस सख्त फैसले के बाद अब अकोट और अंबरनाथ में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों के कई स्थानीय पदाधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

यह कदम आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी की अपनी ‘कट्टर हिंदुत्व’ और ‘कांग्रेस मुक्त’ छवि को बरकरार रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.