चंपत राय राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अपना पक्ष रखते हुए

चंदा चोरी विवाद: चंपत राय ने एसआईटी को सौंपा अपना लिखित बयान

राम मंदिर चंदा चोरी: चंपत राय ने SIT को सौंपा लिखित बयान, खुद को बताया निर्दोष; SBI की सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ चयन पर उठाए गंभीर सवाल”

अयोध्या : THE POLITICS AGAIN डेस्क: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चंदा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने बड़ा कदम उठाया है।

महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने पहले ‘राम भक्तों’ के नाम एक भावुक पत्र लिखा और अब इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को अपना विस्तृत लिखित बयान सौंप दिया है।

राम भक्तों के नाम लिखे पत्र में चंपत राय ने खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने ‘मौन धारण’ कर लिया है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि जल्द ही इस पूरे मामले का सच सबके सामने आ जाएगा।

SIT को दिए बयान में क्या है? (दिशा-निर्देशों पर असहमति)

चंपत राय ने एसआईटी (SIT) को सौंपे गए अपने लिखित बयान में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं:

  • फर्जी दिशा-निर्देश का दावा: चंपत राय ने बताया कि 5 फरवरी 2025 को SBI की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र द्वारा नोटों की गिनती संबंधी जो दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, वे उससे सहमत नहीं थे।

  • हस्ताक्षर नहीं होने का तर्क: उनका दावा है कि इस दिशा-निर्देश पत्र पर उनके हस्ताक्षर (Signature) हैं ही नहीं।

  • जबकि अगस्त 2020 से लेकर जून 2026 तक के अन्य सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर उनके और अन्य संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।

  • देर से मिली जानकारी: चंपत राय के अनुसार, बैंक के इस एकतरफा दिशा-निर्देश की जानकारी उन्हें काफी देर से, 13 जून 2026 को तब हुई जब उन्हें अकाउंट ऑफिस से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुए।

  • हालांकि दिशा-निर्देश की प्रति महासचिव को भेजे जाने का उल्लेख था, लेकिन उन्हें इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।

बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और 2024 के MoU पर गंभीर सवाल

एसआईटी को दिए गए बयान में चंपत राय ने सुरक्षा में हुई भारी चूक का ठीकरा सीधे बैंक प्रबंधन पर फोड़ा है।

उन्होंने याद दिलाया कि 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में सुरक्षा के बेहद कड़े और स्पष्ट प्रावधान थे:

  • गिनती कक्ष (Counting Room) में उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाए जाने थे।

  • सुरक्षा के लिए लोहे की सलाखों वाला मजबूत दरवाजा लगाया जाना था।

  • कर्मचारियों को फर्श के बजाय मेज पर बैठाकर नोटों की गिनती कराने की व्यवस्था तय की गई थी।

चंपत राय का कहना है कि यदि बैंक ने इन तय सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया होता, तो इस तरह की चोरी की संभावना न के बराबर होती।

तलाशी में ढिलाई और ‘हाउसकीपिंग स्टाफ’ पर आपत्ति

अपने बचाव और बैंक की लापरवाही को उजागर करते हुए चंपत राय ने जांच एजेंसी को बताया:

  • तलाशी नहीं हुई: नोटों की गिनती कक्ष में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय कर्मचारियों की सघन तलाशी (Frisking) नहीं ली गई।

  • जेब वाले कपड़े: सुरक्षा नियमों के तहत कर्मचारियों को ‘बिना जेब वाले कपड़े’ पहनने थे, लेकिन बैंक द्वारा कर्मचारियों को जो कपड़े मुहैया कराए गए, उनमें भी जेब मौजूद थीं। यह बैंक के अपने ही नियमों का सीधा उल्लंघन था।

  • स्टाफ का चयन: सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए चंपत राय ने कहा कि करोड़ों रुपये के चंदे की गिनती के लिए जिन युवकों को चुना गया था, वे असल में ‘हाउसकीपिंग स्टाफ’ (सफाई कर्मचारी) के रूप में रखे गए थे।

  • इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ का उपयोग करना बिल्कुल अनुचित था।

चंपत राय के इस लिखित बयान ने एसआईटी जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। अब जांच एजेंसी (SIT) बैंक अधिकारियों और सुरक्षा में हुई इन गंभीर चूकों की बारीकी से पड़ताल करेगी, ताकि चंदा चोरी के इस महाघोटाले के असली गुनहगारों को बेनकाब किया जा सके।

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.