संसद के मानसून सत्र में डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल पेश होने की अटकलें तेज हैं। बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों के समर्थन (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता होगी।
परिसीमन बिल पर सस्पेंस: क्या मानसून सत्र में मोदी सरकार जुटा पाएगी 360 का जादुई आंकड़ा? सुप्रिया सुले ने किया बड़ा खुलासा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले ‘डीलिमिटेशन’ यानी परिसीमन बिल को लेकर देश की सियासत अचानक गरमा गई है।
पिछले संसद सत्र में मोदी सरकार इस अहम विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं करा सकी थी, क्योंकि सरकार जरूरी 360 वोटों से 54 वोट पीछे रह गई थी।
अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और पर्दे के पीछे चल रही बातचीत के बीच यह कयास तेज हो गए हैं कि सरकार एक बार फिर इस बिल को सदन के पटल पर ला सकती है।
अगर ऐसा होता है, तो यह मानसून सत्र मौजूदा राजनीतिक माहौल की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगा।
संविधान संशोधन से जुड़े इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की दरकार है।
वर्तमान में सदन में कुल 540 सदस्य हैं, जिसके हिसाब से बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।
सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के पास फिलहाल 298 सांसद हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी और उद्धव ठाकरे (UBT) गुट के 6 सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं, तो यह आंकड़ा 324 तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद सरकार बहुमत से 36 वोट दूर रह जाती है।
इस गणित को सुलझाने के लिए सरकार की नजरें अब विपक्ष के दो अहम दलों—DMK और NCP (शरद पवार गुट) पर टिकी हैं।
माना जा रहा है कि अगर डीएमके के 22 और शरद पवार गुट के 8 सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो एनडीए का आंकड़ा 354 तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, इसके बाद भी सरकार जादुई आंकड़े (360) से 6 वोट पीछे रहेगी, जिसे छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों के जरिए पूरा किया जा सकता है।
परिसीमन को लेकर एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा कर सियासी पारे को और चढ़ा दिया है।
सुप्रिया सुले ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में एक समान 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था।
सुले ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार पूरे देश में समान रूप से 50% सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव लाती है, तो उनकी पार्टी इस पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ने पर वह इस संबंध में सदन में ‘आधिकारिक संशोधन (Official Amendment)’ लाने के लिए भी तैयार हैं।
सुप्रिया सुले के इस बयान ने विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या शरद पवार और डीएमके इस मुद्दे पर सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विपक्ष की एकजुटता कायम रहेगी?
हालांकि, सुले ने अपनी सफाई में एनडीए में शामिल होने की किसी भी अटकल को सिरे से खारिज किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा है और कोई भी बड़ा राजनीतिक फैसला गठबंधन के साथ मिलकर ही लिया जाएगा।
सभी की निगाहें अब सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र पर हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या मोदी सरकार इस बार अपने तरकश से कोई नया तीर निकालकर 360 का जादुई आंकड़ा छू पाती है या नहीं।
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