दिल्ली बच्चा चोर गिरोह : डॉक्टर, खरीदार और माता-पिता समेत 10 गिरफ्तार
संतान की चाह में गंदा खेल: दिल्ली में नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 10 गिरफ्तार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
देश की राजधानी में नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।
मध्य जिला पुलिस ने इस अमानवीय कारोबार में शामिल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में तस्कर, बिचौलिए, बच्चे खरीदने वाले, अस्पताल संचालक और यहां तक कि बच्चों के असली (जैविक) माता-पिता भी शामिल हैं।
पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चार बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है।
इन सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर उनके संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
9 बच्चे अब तक हो चुके हैं मुक्त इससे पहले 5 जून को भी दिल्ली पुलिस ने एक अन्य अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए नवजात समेत 5 बच्चों को मुक्त कराया था।
उसी गिरोह की गहन जांच के दौरान पुलिस को इस दूसरे नेटवर्क के बारे में सुराग मिला। दोनों ऑपरेशनों को मिलाकर पुलिस अब तक कुल 9 बच्चों को तस्करों के चंगुल से आज़ाद करा चुकी है।
एंटी नारकोटिक्स सेल ने ऐसे बिछाया था जाल पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स सेल ने 5 जून को पहाड़गंज इलाके में नकली ग्राहक बनकर तस्करों को पकड़ने का जाल बिछाया था।
इस दौरान दो महिलाओं और ललित नाम के एक आरोपी ने 4-5 दिन के नवजात को बेचने का प्रयास किया था।
पुलिस ने तुरंत बच्चे को छुड़ाकर 20 हजार रुपये की टोकन मनी भी बरामद कर ली थी। इसी कड़ी को जोड़ते हुए गुजरात और दिल्ली के अन्य आरोपियों तक पुलिस के हाथ पहुंचे।
कहां से कितने बड़े बच्चे हुए बरामद?
पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर 16 दिन से लेकर 13 माह तक के बच्चों को बरामद किया है:
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दिल्ली (रोहिणी): 16 दिन का नवजात बच्चा
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उत्तराखंड (ऋषिकेश): एक माह का लड़का
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उत्तराखंड (हरिद्वार): आठ माह का लड़का
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उत्तर प्रदेश (मथुरा): 13 माह का लड़का
कैसे काम करता था यह गिरोह? (Modus Operandi)
यह गिरोह मुख्य रूप से उन दंपतियों को अपना शिकार बनाता था जिनकी कोई संतान नहीं थी या जिन्हें बेटे की चाहत थी।
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आरोपी बिचौलिए गरीब जैविक माता-पिता से संपर्क कर बच्चे की डिलीवरी तक का पूरा खर्च उठाते थे और बाद में उन बच्चों को लाखों रुपये में जरूरतमंदों को बेच देते थे।
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जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि एक जैविक मां से बच्ची लेकर उसे एक भी पैसा नहीं दिया गया।
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वहीं, गुजरात के एक दंपती से नवजात को कम कीमत में खरीदकर उसे हरियाणा के एक दंपती को कई गुना अधिक कीमत (मोटे मुनाफे) पर बेच दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और उनके काले कारनामे
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साबरकांठा (गुजरात) का कांतिभाई गमार और उसकी पत्नी: इन असली (जैविक) माता-पिता ने चंद पैसों के लिए अपना ही नवजात बच्चा बेच दिया।
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शंकर गमार (गुजरात): यह तस्कर जैविक माता-पिता से बच्चों की व्यवस्था कराने का काम करता था।
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गुरुग्राम की महिला: बच्चों की खरीद-फरोख्त में मुख्य बिचौलिया (Middleman) का काम करती थी।
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गरिमा जैन और सतीश जैन (रोहिणी, दिल्ली): गरिमा ने ‘हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल’ से बच्चा लिया था। उसके ससुर सतीश जैन ने इसके लिए एक महिला डॉक्टर को 8 लाख रुपये का भुगतान किया था।
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अमित प्रताप व आभा सिंह (हरिद्वार): बेटे की चाहत में इस दंपती ने करीब 5 लाख रुपये देकर बच्चा खरीदा।
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केतकी गुप्ता (ऋषिकेश): 4 लाख रुपये में बच्चा खरीदा।
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राम प्रकाश निषाद: इस सेवानिवृत्त शिक्षक ने भी एक लड़का खरीदा था।
बैंक खातों में लाखों का लेन-देन, जांच जारी
इस काले धंधे में पुलिस को कई लाख रुपये के बैंक लेन-देन (Money Trail) के सबूत मिले हैं। पुलिस अब सभी आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों को खंगाल रही है,
ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सफेदपोश लोगों और अस्पतालों की भूमिका का भी पर्दाफाश किया जा सके।











