दिल्ली : बिहार के 4 मोस्ट वांटेड गैंगस्टर पुलिस मुठभेड़ में ढेर

“दिल्ली के रोहिणी में पुलिस ने एक बड़े एनकाउंटर को अंजाम दिया है जिसमें बिहार के 4 मोस्ट वांटेड गैंगस्टर ढेर कर दिए गए हैं। इस एनकाउंटर में गैंग के सरगना रंजन पाठक के अलावा अमन ठाकुर, बिमलेश महतो और मनीष पाठक को भी मारा गया है।”

नई दिल्ली 23 / 10 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अमन ठाकुर को छोड़कर तीन गैंगस्टर बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे जबकि अमन ठाकुर दिल्ली के करावल नगर का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि ये चारों बिहार में चुनाव से पहले किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने वाले थे लेकिन उससे पहले दिल्ली और बिहार पुलिस की टीम ने इनका एनकाउंटर कर दिया।

कौन था रंजन पाठक, क्या है ‘सिग्मा गैंग’ की क्राइम कुंडली?

दिल्ली के रोहिणी में एनकाउंटर में मारा गया रंजन पाठक हाल के दिनों में सीतामढ़ी जिले में बैक टू बैक हत्या की वारदात को अंजाम दे रहा था। वह सिग्मा एंड कंपनी नाम का आपराधिक संगठन चला रहा था। यह गैंग बिहार-नेपाल सीमा तक फैला हुआ था।

रंजन पाठक इसका मास्टरमाइंड था जो सोशल मीडिया के जरिए भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता था। गैंग के सदस्य बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में रंगदारी, सुपारी किलिंग और हथियार सप्लाई जैसे अपराधों में लिप्त थे।

बताया जा रहा है कि गैंग की फंडिंग नेपाल के रास्ते होती थी और इसकी जड़ें सीमावर्ती जिलों में गहरी थीं। रंजन पाठक गैंग ने बाजपट्टी में आदित्य सिंह की हत्या करने के बाद परोहा पंचायत की मुखिया रानी देवी के देवर मदन कुशवाहा की हत्या कर दी थी।

इसके अलावा ब्रह्मर्षि सेना के जिला अध्यक्ष राम मनोहर शर्मा की भी गोली मारकर हत्या की थी। इस मामले में रंजन पाठक ने मीडिया को कॉल करके हत्या की जिम्मेदारी ली थी और पर्चा भी भेजा था। पर्चे में रंजन पाठक ने अपने गैंग का नाम सिग्मा एंड कंपनी होने का खुलासा किया था। 

मीडियाकर्मियों को भेजा था ‘क्रिमिनल बायोडेटा’

पर्चे में रंजन पाठक ने जिला पुलिस की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया था। उसने कहा था कि गंदी राजनीति, क्रूर जातिवाद और असमाजिक तत्वों के दवाब में आकर भ्रष्ट पुलिस ने रिश्वत लेकर उसे झूठे मुकदमे में लपेट कर उसका जीवन नरक बना दिया।

उसे मजबूर किया गया। सीतामढ़ी में एक चर्चित हत्याकांड के बाद रंजन पाठक ने अपना ‘क्रिमिनल बायोडेटा’ मीडियाकर्मियों को भेजा था। उसका मकसद था डर और पहचान दोनों बनाना।

ताबड़तोड़ हत्या की वारदात को दिया अंजाम

पड़ोसी जिले शिवहर में गुड्डू झा की भी दिनदहाड़े गोली मारकर रंजन पाठक और उसके गैंग ने हत्या की थी। इस मामले में उसके अन्य साथियों की सीतामढ़ी पुलिस और STF के साथ मुठभेड़ हुई थी।

जिसमें चारों अपराधियों के पैर में गोली लगी थी लेकिन रंजन पाठक तब फरार हो गया था। इसके अलावा भी रंजन पाठक पर जिले के कई थानों में हत्या लूट रंगदारी के कई मामले दर्ज थे।

पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था रंजन पाठक

ताबड़तोड़ हत्या की वारदात को अंजाम देकर रंजन पाठक एक तरह से पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। पुलिस के मुताबिक, इस गैंग की निगरानी पिछले कई महीनों से की जा रही थी। दिल्ली में उनका ठिकाना चिन्हित किया गया।

ऑपरेशन की योजना पूरी तरह से चुनावी सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई थी ताकि बिहार में चुनाव से पहले किसी बड़े अपराध को रोका जा सके। दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस के इस ज्वाइंट ऑपरोशन को अब तक की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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