IBC के 10 साल पूरे: 4000 कंपनियों को नया जीवन, NPA में भारी कमी
IBC के 10 साल पूरे : भारत के दिवाला ढांचे में बड़ा बदलाव, 14 लाख करोड़ के मामले सुलझे, 4000 से अधिक कंपनियों को मिला नया जीवन “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत के वित्तीय और कानूनी सुधारों के इतिहास में एक मील का पत्थर माने जाने वाले ‘दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता’ (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) ने अपने सफल क्रियान्वयन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
साल 2016 में लागू हुए इस ऐतिहासिक कानून ने महज एक दशक में देश के ऋण बाजारों (Credit Markets), निवेशकों के विश्वास और कॉर्पोरेट जगत के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।
10 सालों में क्या बदला? (आंकड़ों की जुबानी)
IBC से पहले, भारत का दिवाला ढांचा बेहद बिखरा हुआ था, जहां रिकवरी में 6 से 8 साल लग जाते थे। अब यह समय सीमा घटकर लगभग 2 वर्ष रह गई है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस संहिता की सफलता साफ नजर आती है:
सफल समाधान: अब तक 1,419 मामलों में समाधान योजनाएं तैयार की गई हैं, जिससे लेनदारों (Creditors) को 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई है।
कंपनियों का पुनरुद्धार: दर्ज किए गए 8,987 मामलों में से 7,102 का निपटारा हो चुका है। इनमें से करीब 58 प्रतिशत यानी 4,099 कंपनियों को डूबने से सफलतापूर्वक बचा लिया गया।
NPA में भारी गिरावट: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में बैंकिंग क्षेत्र का ग्रॉस NPA लगभग 11.8 प्रतिशत था, जो IBC और अन्य सुधारों के चलते सितंबर 2025 तक घटकर महज 2.1 प्रतिशत रह गया।
डिफॉल्टरों में खौफ : NCLT पहुंचने से पहले ही सुलझे 14 लाख करोड़ के मामले
IBC का सबसे बड़ा असर इसकी निवारक (Deterrent) शक्ति के रूप में दिखा है। इस कानून ने उधारकर्ताओं के बीच ऋण चुकाने का कड़ा अनुशासन पैदा किया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में मामले के स्वीकार होने से पहले ही 30,000 से अधिक मामले (जिनमें लगभग 14 लाख करोड़ रुपये की राशि फंसी थी) आपसी निपटान के जरिए सुलझा लिए गए।
वसूली दर और कॉर्पोरेट वैल्यू में भारी इजाफा
वसूली दर (Recovery Rate) में उछाल: IBC से पहले औसत वसूली दर 15-20% थी, जो अब बढ़कर लगभग 30% से 36.6% (2024-25 में) हो गई है। RBI ने IBC को संकटग्रस्त संपत्तियों की वसूली का सबसे प्रभावी हथियार माना है।
बाजार मूल्यांकन (Market Valuation) बढ़ा: IIM अहमदाबाद (2025) के एक अध्ययन के अनुसार, समाधान के बाद कंपनियों की बिक्री में 89% की वृद्धि हुई है।
जिन सूचीबद्ध (Listed) कंपनियों का समाधान हुआ, उनका कुल बाजार मूल्यांकन 5 वर्षों में 2.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
भारत की दिवाला प्रणाली में हुए इस सुधार को अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भी सराहा है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने घरेलू समाधान और वसूली प्रणाली की कार्यकुशलता में सुधार को देखते हुए भारत के दिवाला ढांचे को ‘ग्रुप सी’ से ‘ग्रुप बी’ (Group B) में अपग्रेड कर दिया है।
2047 के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, यह स्पष्ट है कि IBC एक सुदृढ़ दिवाला प्रणाली के रूप में उद्यमशीलता को बनाए रखने, वित्तीय स्थिरता को गहरा करने और देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
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