Gariaband PM Awas Yojana

छत्तीसगढ़ / गरियाबंद: PM आवास के लिए CEO के पैरों में गिरे ग्रामीण

गरियाबंद में ‘सुशासन’ की खुली पोल: पक्के मकान के लिए CEO के पैरों में गिरे कमार जनजाति के लोग, दंडवत होकर लगाई गुहार

गरियाबंद (छत्तीसगढ़): द पॉलिटिक्स अगेन : कृष्णा सोनी की रिपोर्ट 

सरकारें हमेशा ‘अंतिम व्यक्ति तक’ योजनाओं का लाभ पहुंचाने और ‘सुशासन’ का दावा करती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से आई एक तस्वीर ने इन दावों की जमीनी हकीकत की पोल खोल दी है।

जिले में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ (Good Governance Festival) कार्यक्रम के दौरान एक बेहद भावुक और विचलित करने वाला दृश्य देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का लाभ न मिलने से परेशान कमार जनजाति के लोग जिला पंचायत CEO के सामने दंडवत हो गए।

किसी ने अधिकारी के पैर पकड़े, तो कोई जमीन पर लेटकर अपने पक्के मकान की गुहार लगाता नजर आया।

क्या है ग्रामीणों की पीड़ा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना देवभोग विकासखंड के बरही गांव की है। यहां रहने वाले कमार जनजाति के कई परिवार लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं।

  • जर्जर हाल में जीवन: ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से टूटे-फूटे और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में छतों से पानी टपकता है, जिससे पूरा परिवार असुरक्षित और दयनीय हालात में रातें गुजारता है।

  • सिर्फ आश्वासन मिला: महिलाओं और बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक कई बार पक्के मकान के लिए आवेदन दिया।

  • लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। पात्र होने के बावजूद उनका नाम आवास योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

‘सुशासन’ के मंच पर लाचारी का प्रदर्शन

जब ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत CEO लोगों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी कमार समाज के लोग अपनी फरियाद लेकर वहां पहुंचे और अधिकारी के पैरों में गिर पड़े। इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया।

यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। ‘कमार’ समुदाय को विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) का दर्जा प्राप्त है।

सरकार इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं चलाने का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जब इसी समुदाय के लोगों को एक अदद छत के लिए अधिकारियों के सामने जमीन पर लोटना पड़े, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर करारा तमाचा है।

प्रशासन का रटा-रटाया जवाब

इस भावुक कर देने वाले घटनाक्रम के बाद, प्रशासन की ओर से वही रटा-रटाया आश्वासन दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और संबंधित परिवारों के दस्तावेजों व पात्रता की समीक्षा कर उन्हें नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या न्याय और अधिकार पाने के लिए गरीबों को हर बार इसी तरह अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ेगा?

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