ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट के मैरीटाइम कंट्रोल सेंटर पर अमेरिकी हमले के बाद भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह पोर्ट भारत के लिए पाकिस्तान को बाईपास करने का अहम रास्ता है।
ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिका का भीषण हमला, ‘मैरीटाइम कंट्रोल सेंटर’ तबाह; भारत की बढ़ी चिंता”
तेहरान/नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने भारत की चिंताएं भी काफी बढ़ा दी हैं।
अमेरिका ने दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित सामरिक महत्व के ‘चाबहार पोर्ट’ पर रात के समय भीषण हमला किया है। इस हमले में बंदरगाह के मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा है।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके ईरान और अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।
ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में पोर्ट्स एंड मैरीटाइम अफेयर्स अथॉरिटी ने बुधवार को इन हमलों की पुष्टि की है।
अथॉरिटी के पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी प्रोजेक्टाइल (मिसाइलों/गोलों) से चाबहार के मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर पर सीधा प्रहार किया गया।
ईरान ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह मैरीटाइम वॉचटावर एक पूरी तरह से ‘सिविलियन सुविधा’ है।
इसका मुख्य इस्तेमाल समुद्र में मछुआरों के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने तथा समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमले केवल चाबहार तक सीमित नहीं रहे। ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुज़ेस्तान प्रांत में भी रात के समय अमेरिकी प्रोजेक्टाइल से गेहूं के भंडारण वाले साइलो और एक अन्य महत्वपूर्ण जगह को निशाना बनाया गया।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव को और भड़काते हुए चेतावनी दी है कि ईरान पर हमले जारी रहेंगे और आने वाले दिनों में इनकी तीव्रता और बढ़ाई जाएगी।
ट्रंप ने दो टूक कहा कि अगर तेहरान प्रशासन बातचीत की मेज़ पर वापस नहीं लौटता है, तो अमेरिका अगले हफ्ते से ईरान के महत्वपूर्ण पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाना शुरू कर देगा।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भारी तनाव देखने को मिला है।
स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौता (MoU) हुआ था, जिसका उद्देश्य संघर्ष को खत्म कर स्थायी शांति स्थापित करना था।
हालांकि, दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले कर इस समझौते को तोड़ दिया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को पत्र लिखकर अमेरिका पर इस्लामाबाद समझौते के सीधे उल्लंघन का आरोप लगाया है।
चाबहार पोर्ट पर हमले ने नई दिल्ली में खतरे की घंटी बजा दी है:
रणनीतिक महत्व: चाबहार पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को पूरी तरह से बाईपास (शून्य भूमिका) करके ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपने माल की आवाजाही सुनिश्चित करता है।
भारत का रुख: चाबहार पर पहले अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार और अब सीधे सैन्य हमलों ने भारत के लिए कई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
शांति की अपील: यही कारण है कि भारत लगातार कड़ा रुख अपनाते हुए कह रहा है कि युद्ध में नागरिक और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर (Civilian and Energy Infrastructure) को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि सभी पक्षों को शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
जौनपुर : राष्ट्रीय लोक अदालत में 59,218 मुकदमों का रिकॉर्ड निस्तारण, 22.57 करोड़ रुपये का…
ब्रिक्स 2026: ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने किए जगद्गुरु सतीशाचार्य जी महाराज के चरण स्पर्श,…
ब्रिक्स समिट 2026: मोदी, पुतिन और जिनपिंग की एक तस्वीर में दिखा नया 'वर्ल्ड ऑर्डर',…
ब्रिक्स समिट 2026 (पहला दिन): साझा घोषणापत्र जारी, आतंकवाद पर कड़ा प्रहार और मोदी-जिनपिंग वार्ता…
ब्रिक्स बैठक: साझा मुद्रा या 'डी-डॉलराइजेशन' का जिक्र नहीं, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और UPI…
ब्रिक्स 2026: शी जिनपिंग का मध्य पूर्व में शांतिदूत बनने का आह्वान, मनमाने टैरिफ और…