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देश के सभी 17,762 थाने CCTNS से जुड़े, राज्यसभा में सरकार का बयान

देश के सभी 17,762 थाने CCTNS से जुड़े: राज्यसभा में सरकार ने गिनाए डिजिटल पुलिसिंग के फायदे”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम’ (CCTNS) देश भर में एक बड़ी सफलता बन चुका है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बांदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 1 जून 2026 तक देश के सभी 17,762 पुलिस स्टेशन CCTNS नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

इस प्रणाली ने पुलिस, जांच एजेंसियों और नागरिकों के लिए अपराध से जुड़े डेटा के रियल-टाइम संग्रह, अद्यतन और विश्लेषण को बेहद आसान बना दिया है।

CCTNS से पुलिसिंग में आया क्रांतिकारी बदलाव

CCTNS के जरिए देश भर के पुलिस स्टेशनों को एक मंच पर लाने से कई बड़े फायदे हुए हैं:

  • प्रक्रियाओं का कम्प्यूटरीकरण: शिकायतें, एफआईआर (FIR), जांच विवरण, आरोप पत्र (Charge Sheet) और चालान जैसी सभी पुलिस प्रक्रियाएं अब पूरी तरह से डिजिटल हो गई हैं।

  • राष्ट्रीय डेटाबेस: राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपराध और अपराधियों के डेटाबेस में अब एक क्लिक से जानकारी खोजी जा सकती है।

  • एजेंसियों में समन्वय: प्रभावी न्याय के लिए पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI, NIA आदि), न्यायालयों, जेल और फोरेंसिक विभागों के बीच डेटा साझा करना आसान हो गया है।

नागरिकों के लिए ‘डिजिटल पुलिस पोर्टल’ की सुविधाएं

डिजिटल पुलिस पोर्टल और केंद्रीय नागरिक सेवा पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों को भी घर बैठे कई सुविधाएं मिल रही हैं।

इनमें लापता व्यक्तियों की खोज, वाहनों के लिए NOC जनरेट करना, घोषित अपराधियों की जानकारी और निकटतम पुलिस स्टेशन का पता लगाना शामिल है।

राज्य पुलिस पोर्टल पर मिल रहीं 9 अनिवार्य डिजिटल सेवाएं

इसके अतिरिक्त, विभिन्न राज्यों के पुलिस नागरिक पोर्टलों द्वारा अब 9 अनिवार्य सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जा रही हैं:

  1. संबंधित पुलिस स्टेशन में ई-शिकायत दर्ज कराना।

  2. दर्ज शिकायतों की वर्तमान स्थिति (Status) जानना।

  3. एफआईआर (FIR) की प्रतियां प्राप्त करना।

  4. गिरफ्तार व्यक्तियों और वांछित अपराधियों का विवरण देखना।

  5. लापता या अपहृत व्यक्तियों की जानकारी।

  6. चोरी हुए या बरामद वाहनों, हथियारों और अन्य संपत्तियों का विवरण।

  7. जुलूस, कार्यक्रम, प्रदर्शन या हड़ताल के लिए NOC जारी करने या नवीनीकरण का अनुरोध।

  8. नौकरों, रोजगार, पासपोर्ट और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुलिस सत्यापन (Verification)।

  9. नागरिकों के लिए सूचना साझाकरण और आवश्यक प्रपत्र (Forms) डाउनलोड करने की सुविधा।

सरकार का यह कदम ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसने न केवल कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया है बल्कि आम आदमी की पुलिस तक पहुंच को भी सरल कर दिया है।

Santosh SETH

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