चावल की महंगाई पर सरकार का बड़ा एक्शन। व्यापारियों के लिए स्टॉक की घोषणा हुई अनिवार्य, जमाखोरी पर लगेगी लगाम। वहीं, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 'भारत चावल' का कोटा किया गया दोगुना। (ग्राफिक्स: द पॉलिटिक्स अगेन)
चावल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा ‘एक्शन’: व्यापारियों के लिए स्टॉक घोषणा अनिवार्य, ‘भारत चावल’ का कोटा किया दोगुना’
The Politics Again डेस्क: संतोष सेठ
खाद्य अनाजों, विशेष रूप से चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी को रोकने के लिए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।
घरेलू बाजार में चावल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने कई बड़ी नीतियों का ऐलान किया है,
जिसमें स्टॉक सीमा लागू करना और ‘भारत चावल’ (Bharat Rice) की बिक्री का लक्ष्य दोगुना करना शामिल है।
सरकार ने 6 नवंबर 2026 को एक सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और मिल मालिकों (Processors) को अपने चावल और धान के स्टॉक की अनिवार्य रूप से घोषणा करनी होगी। यह घोषणा निम्नलिखित छह श्रेणियों में की जानी है:
बासमती चावल
गैर-बासमती प्रीमियम चावल
गैर-बासमती चावल
उबला हुआ चावल (Parboiled Rice)
टूटा हुआ चावल (Broken Rice)
धान (Paddy)
सभी इकाइयों को हर शुक्रवार को फ़ूड स्टॉक पोर्टल (https://foodstock.dfpd.gov.in) पर अपनी सटीक जानकारी अपडेट करनी होगी।
यदि कोई व्यापारी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं मिलता है या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ (Essential Commodities Act) की धारा 6 और 7 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिणी राज्यों में 31 जनवरी 2027 तक स्टॉक सीमा लागू
चावल की बढ़ती मांग और कीमतों को देखते हुए, सरकार ने 5 दक्षिणी राज्यों— आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को धान और चावल पर स्टॉक सीमा लागू करने की विशेष सहमति दे दी है।
राज्य सरकारें 31 जनवरी 2027 तक जरूरत के अनुसार उचित नियंत्रण आदेश जारी कर सकेंगी। केंद्र और राज्य सरकारें इस पर कड़ी नजर रखेंगी ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके।
आम उपभोक्ताओं को सीधे राहत देने के लिए सरकार ने 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (घरेलू) [OMSS (D)] के तहत बेचे जाने वाले चावल का लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) से बढ़ाकर 50 LMT (दोगुना) कर दिया है।
31 अक्टूबर 2026 तक ई-नीलामी के जरिए 25 LMT चावल पहले ही बेचा जा चुका है (जो पिछले साल इसी अवधि में केवल 11 LMT था)।
इसके अलावा, पूरे देश (विशेषकर दक्षिण भारत) में ‘भारत चावल’ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख एजेंसियों— NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार को अतिरिक्त स्टॉक आवंटित किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि वितरण के सभी माध्यमों का उपयोग करके किफायती दरों पर चावल सीधे उपभोक्ताओं की थाली तक पहुंचे।
ये कदम स्पष्ट करते हैं कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण और आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
| सरकार के अहम फैसले (Key Decisions) | विवरण और प्रभाव (Details & Impact) |
| स्टॉक की अनिवार्य घोषणा | सभी व्यापारियों/मिल मालिकों को हर शुक्रवार फ़ूड स्टॉक पोर्टल पर जानकारी देनी होगी। |
| किन चावलों पर लागू? | बासमती, गैर-बासमती (प्रीमियम/सामान्य), उबला, टूटा चावल और धान। |
| कड़ी कार्रवाई की चेतावनी | उल्लंघन करने पर ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ की धारा 6 व 7 के तहत दंड। |
| दक्षिणी राज्यों में स्टॉक सीमा | आंध्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में 31 जनवरी 2027 तक स्टॉक सीमा लागू। |
| भारत चावल का कोटा दोगुना | OMSS के तहत बिक्री लक्ष्य 25 LMT से बढ़ाकर 50 LMT किया गया। |
| वितरण एजेंसियां (Agencies) | NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के जरिए किफायती चावल की सीधी बिक्री। |
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