Union Environment Minister Bhupender Yadav holds a Parliamentary Committee meeting in New Delhi to discuss technology, AI, and community-based solutions to mitigate human-wildlife conflicts.
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर केंद्र का मंथन: AI और ड्रोन से होगी निगरानी, 6 राज्यों ने पेश किया ‘सुपर मॉडल’
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict – HWC) की घटनाओं को रोकने और लोगों व वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कवायद तेज कर दी है।
नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई।
बैठक में आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन), सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई के जरिए जंगली जानवरों के हमलों को कम करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
संसदीय समिति को बताया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी वैज्ञानिक और तकनीकी प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप ‘मानव-वन्यजीव टकराव उत्कृष्टता केंद्र’ (CoE-HWC) की स्थापना की गई है।
डेटा प्रबंधन और त्वरित कार्रवाई के लिए 10 जुलाई 2026 को ‘राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव टकराव पोर्टल’ भी लॉन्च किया जा चुका है।
दक्षिण भारत में हाथियों के संरक्षण के लिए एक विशेष ‘क्षेत्रीय कार्य योजना’ (RAP) को भी मंजूरी दी गई है।
बैठक में असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने वन्यजीवों से बचाव के लिए अपने बेहतरीन मॉडल और रणनीतियां पेश कीं:
कर्नाटक: AI-सक्षम निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और डिजिटल मुआवजा प्रणाली (ई-परिहारा) का ‘सिक्स-पिलर मॉडल’ पेश किया।
मध्य प्रदेश: ड्रोन, गजरक्षक, बाघ मित्र और AI ट्रैकिंग से लैस ‘रोकथाम प्रथम’ (Prevention First) मॉडल की जानकारी दी।
केरल: मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य-विशिष्ट ‘आपदा’ घोषित करने और SARPA स्वयंसेवक नेटवर्क जैसे मजबूत संस्थागत ढांचे को सामने रखा।
उत्तराखंड: 24×7 हेल्पलाइन (1926), ‘तेंदुओं/बाघों के साथ रहना’ पहल और बायो-फेंसिंग के उपायों पर जोर दिया।
असम और उत्तर प्रदेश: असम ने भू-भाग आधारित रणनीति तो वहीं यूपी ने तराई क्षेत्र में तेंदुओं के हमलों को रोकने के लिए सौर बाड़ (Solar Fencing) और बचाव केंद्रों की रूपरेखा पेश की।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, तकनीकी निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का संतुलित दृष्टिकोण अपनाना ही एकमात्र उपाय है।
वहीं, राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सुझाव दिया कि जंगलों में वन्यजीवों की आबादी को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कर वहां की ‘वहन क्षमता’ (Carrying Capacity) का पता लगाया जाना चाहिए, ताकि संसाधनों की कमी से जानवर आबादी की ओर रुख न करें।
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