सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल चुनाव में 34 लाख लोग नहीं डाल सकेंगे वोट
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल चुनाव में पेंडिंग अपील वाले 34 लाख लोग नहीं डाल सकेंगे वोट, जानें पूरी डिटेल
नई दिल्ली/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में इसी महीने होने वाले हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सुनाया है।
राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर चल रहे भारी विवाद के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं और उनकी अपील अभी लंबित (Pending) है, उन्हें आगामी चुनाव में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनावी राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिससे सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच टकराव और तेज होने की पूरी संभावना है।
‘वोटिंग की इजाजत दी तो व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी’
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच कर रही है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक संबंधित अपीलों पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ऐसे व्यक्तियों को वोट देने की इजाजत देना कानूनी प्रक्रिया के सख्त खिलाफ होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर लंबित अपील वाले लोगों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो पूरी चुनाव व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।
34 लाख से ज्यादा वोटरों पर लटकी तलवार
सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े फैसले के बाद पश्चिम बंगाल के करीब 34 लाख से ज्यादा वोटरों के मताधिकार पर तलवार लटक गई है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य में वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (SIR) की गई थी, जिसमें लाखों लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए थे।
जिन लोगों के नाम कटे, उन्होंने इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल और अदालतों में अपील दायर की है। अब तक राज्य भर से 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर हो चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की तीन अहम टिप्पणियां:
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वोटर लिस्ट से नाम हटने के खिलाफ जिनकी अपील अभी लंबित है, उन्हें वोट देने की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जा सकती।
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यदि अपील पर सुनवाई पूरी होकर फैसला पक्ष में आता है और नाम लिस्ट में वापस जुड़ जाता है, तभी संबंधित व्यक्ति को वोट देने का अधिकार मिलेगा।
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इस फैसले का उद्देश्य अपीलीय ट्रिब्यूनल पर अनावश्यक दबाव न पड़ने देना और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना है।
याचिकाकर्ता की दलील और NIA की रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने अदालत में कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी उम्मीद रखते हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि ऐसी धारणा बन रही है जैसे सभी मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि जमीनी हकीकत में ऐसा नहीं है।
इसी अहम सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने मालदा जिले की घटना को लेकर अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत में पेश की।
याद दिला दें कि 1 अप्रैल को मालदा में वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कई न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव किया था।
इस स्टेटस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने NIA से यह भी पूछा है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों का क्या कोई ‘राजनीतिक संबंध’ (Political links) है या नहीं।










