खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमला

ब्रेकिंग: ईरान की लाइफलाइन ‘खर्ग द्वीप’ पर अमेरिका का बड़ा हमला, ट्रंप ने की पुष्टि | The Politics Again

‘ईरान की ‘लाइफलाइन’ खर्ग द्वीप पर अमेरिका का भीषण प्रहार : ट्रंप ने की पुष्टि, क्या वैश्विक तेल संकट की ओर बढ़ रही दुनिया?

नई दिल्ली/वाशिंगटन (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। अभी तक सीधे टकराव से बच रहे अमेरिका ने ईरान के सबसे संवेदनशील आर्थिक केंद्र और उसकी ‘लाइफलाइन’ माने जाने वाले खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर बड़ा हमला बोल दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस हमले की पुष्टि करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी स्ट्राइक में इस द्वीप को भारी नुकसान पहुंचा है।

ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस द्वीप पर हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है।

खर्ग द्वीप: ईरान के लिए क्यों है यह ‘जीवनरेखा’?

ईरान की तटरेखा से करीब 50 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप महज 6 से 8 किलोमीटर लंबा है, लेकिन कूटनीतिक और आर्थिक तौर पर यह ईरान का सबसे बड़ा हथियार है:

  • 90% तेल निर्यात का केंद्र: ईरान द्वारा निर्यात किया जाने वाला लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल इसी द्वीप के टर्मिनलों से होकर दुनिया भर में जाता है।

  • विशाल क्षमता: यहां के टर्मिनलों में हर दिन करीब 70 लाख बैरल कच्चा तेल लोड करने की क्षमता है। इसके अलावा यहां 180 लाख बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडारण (Storage) भी है।

  • गहरे पानी का फायदा: ईरान की मुख्य तटरेखा उथली है, जहां बड़े सुपरटैंकर नहीं रुक सकते। खर्ग द्वीप गहरे पानी में है, जिससे यहां बड़े तेल टैंकर आसानी से लंगर डाल सकते हैं।

  • अर्थव्यवस्था की रीढ़: कच्चे तेल के व्यापार का यह मुख्य केंद्र ईरानी सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है। इसी पैसे से ईरानी नौकरशाही और शक्तिशाली ईरानी सेना के वेतन का भुगतान किया जाता है।

इतिहास का रोचक पहलू: अमेरिकी कंपनी ने ही किया था निर्माण

यह इतिहास की एक बड़ी विडंबना है कि जिस खर्ग द्वीप के तेल निर्यात टर्मिनलों को आज अमेरिका निशाना बना रहा है, उसे मूल रूप से एक अमेरिकी तेल कंपनी ‘एमोको’ (Amoco) ने ही विकसित किया था।

1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की सरकार ने इस रणनीतिक द्वीप को अपने कब्जे में ले लिया था और इसे दक्षिणी ईरान के प्रमुख तेल क्षेत्रों से समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए जोड़ दिया था।

क्या भड़केगा महायुद्ध? चीन की भूमिका और वैश्विक तेल संकट

खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के परिणाम दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विनाशकारी हो सकते हैं:

  1. चीन को सीधा झटका: अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, खर्ग द्वीप से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीददार चीन रहा है। इससे ईरान को भारी राजस्व मिलता रहा है। इस हमले से चीन की ऊर्जा आपूर्ति भी बाधित होगी।

  2. वैश्विक तेल संकट: दुनिया पहले से ही तेल की कीमतों को लेकर संवेदनशील स्थिति में है। खर्ग पर हमले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है।

  3. ट्रंप की कूटनीति: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझते हैं। इसीलिए अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि खर्ग में सिर्फ ईरान के सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया गया है। ईरान की तेल आपूर्ति को पूरी तरह काटने के लिए जमीनी सेना उतारनी पड़ सकती है, जिससे फिलहाल अमेरिका हिचकिचा रहा है।

ईरान की खुली चेतावनी: “पूरे पश्चिम एशिया में जलेगा तेल”

खर्ग द्वीप पर हमले के बाद ईरान ने भी कड़ी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि अगर उसके तेल और आर्थिक ढांचों को तबाह किया गया, तो ईरान भी चुप नहीं बैठेगा।

ईरान ने चेतावनी दी है कि वह पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिका और अमेरिकी कंपनियों के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा, जिससे युद्ध की आग पूरे अरब प्रायद्वीप में फैल सकती है।

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