कच्चा तेल $110 प्रति बैरल के करीब पहुंचा

कच्चे तेल में आग, $110 के पार पहुंचा भाव, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान

“कच्चे तेल में लगी ‘आग’, $110 पहुंचा भाव: ट्रंप बोले- ‘ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए यह बहुत छोटी कीमत ‘

वाशिंगटन/तेहरान (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान से जुड़े भीषण संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया है।

कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल का बचाव किया है।

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा कि यह महंगाई ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की एक अस्थायी कीमत है।

उन्होंने दावा किया, “ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के बाद तेल की कीमतें जल्दी ही कम हो जाएंगी। दुनिया की सुरक्षा के लिए यह बहुत छोटी कीमत है।”

बाजार के मुख्य आंकड़े: 1980 के दशक के बाद सबसे बड़ा उछाल विशेषज्ञों के अनुसार, यह 1980 के दशक की शुरुआत के बाद तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक है।

  • डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI): लगभग 20.75% (18.83 डॉलर) की भारी बढ़त के साथ 109.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

  • ब्रेंट क्रूड (Brent): 18% से ज्यादा बढ़कर लगभग 109.48 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘जाम’, जहाजों ने बदला रास्ता

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों की धमकियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र के बड़े तेल उत्पादकों को मजबूरन अपना उत्पादन कम करना पड़ रहा है, क्योंकि भंडारण टैंक (Storage Tanks) फुल हो चुके हैं और निर्यात के रास्ते बंद हैं।

वैश्विक शेयर बाजारों में ‘सुनामी’, एशियाई बाजार धड़ाम

इस ‘ऑयल शॉक’ का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर दिखा है। ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी पर सबसे ज्यादा निर्भर रहने वाले एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया:

  • जापान: बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 5% गिर गया।

  • दक्षिण कोरिया: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई बाजार 7% से अधिक टूट गया।

भविष्य का खतरा: $143 तक जा सकता है तेल

ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बन सकती है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इस साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल के डरावने स्तर तक पहुंच सकता है।

इतिहास गवाह है कि 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में ऐसे ही उछाल से वैश्विक मंदी (Global Recession) आ गई थी।

यद्यपि अमेरिका अपने घरेलू उत्पादन के कारण कुछ हद तक सुरक्षित है, लेकिन वैश्विक कीमतों में आग लगने से पूरी दुनिया में परिवहन और खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ना तय है।

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