पश्चिम बंगाल : SIR का ‘असर‘ मध्यमग्राम में बस्ती रातोंरात हुई सूनी !

“मध्यमग्राम पालिका के 3 नंबर वार्ड विश्वासपाड़ा इलाके में रातोंरात सन्नाटा पसर गया है। यहां की लगभग पचास से अधिक झुग्गियाँ और छोटे घरों में ताला बंद हैं। यहां तक कि बस्ती के कुछ घर ऐसे भी खुले पड़े हैं जहां रसोई का सामान और स्कूल की किताबें-कॉपियां भी पड़ी हैं”

मध्यमग्राम 25 / 11 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यहां रहने वाले सैकड़ों लोग अचानक ही घरों को ऐेसे ही छोड़कर चले गये और अब यहां सन्नाटा पसरा है। स्थानीय निवासियों का कहना है SIR की घोषणा के बाद ही एक के बाद कुछ लोगों की संख्या कम होने लगी थी मगर अब यहां बनाये गये घरों में कोई नहीं है क्योंकि यहां रहने वाले ‘बांग्लादेशी’ नागरिक थे जो संभवतः देश वापसी की कोशिश में हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप- इन ‘बांग्लादेशियों’ के पास थे भारतीय दस्तावेज

इलाके के निवासी वारिश अहमद ने बताया कि इस जगह पर पहले सुंदरवन से स्थायी निवासी आकर बसे थे मगर फिर यहां जलजमाव की परेशानी को देखते हुए वे लोग यहां से कहीं और जाने लगे, वहीं लगभग 10 सालों से बांग्लादेशियों ने आकर रहना शुरू कर दिया था।

वे यहां कबाड़ का काम करते थे जबकि घर की महिलाएं परिचारिकाओं का काम करती थी। घर के बच्चे स्थानीय स्कूलों में पढ़ने भी जाते थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उनके लिए भी चौंकाने वाली बात यह थी कि इन सभी के पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड भी था। वे सरकारी योजनाओं को लाभ भी ले रहे थे।

फिर आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने इस तरह से रातोंरात इलाका छोड़ दिया। हालांकि सूनी बस्ती और स्थानीय लोगों के उठाये गये सवालों पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं।

स्थानीय माकपा नेता अहमद अली खान ने कहा कि ये उजड़ी बस्ती सरासर प्रशासन की लापरवाही को दर्शाते हैं कि आखिरकार इतनी संख्या में लोग बॉर्डर पार कर कैसे भारत में आये और कैसे सालों से यहां ऐसे रह पाये।

वहीं मध्यमग्राम पालिका के चेयरमैन निमाई घोष ने कहा कि किसी भी गैर भारतीय को राज्य सरकार की किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है।

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