वाराणसी के कर्दमेश्वर महादेव मंदिर में मिलीं 4 अदृश्य ऊर्जा रेखाएं
वाराणसी के 1400 साल पुराने कर्दमेश्वर महादेव मंदिर में मिलीं 4 ‘अदृश्य ऊर्जा रेखाएं’, BHU और अमेरिकी विशेषज्ञों का बड़ा दावा”
वाराणसी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
काशी की प्रसिद्ध पंचक्रोशी यात्रा के पहले पड़ाव, कंदवा स्थित 1400 साल प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर को लेकर एक चौंकाने वाली और रहस्यमयी खोज सामने आई है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने सर्वे के दौरान मंदिर के गर्भगृह में चार अदृश्य ऊर्जा रेखाओं (Earth Energy Lines) की पहचान की है।
यह खोज इस बात को बल देती है कि प्राचीन काल में हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा मंदिरों का निर्माण यूं ही नहीं, बल्कि विशिष्ट ऊर्जा वाले स्थानों को चिन्हित करके किया जाता था।
प्राचीन ‘डाउजिंग’ तकनीक से हुआ सर्वे
अमेरिका के ‘अर्थ एनर्जी एक्सप्लोरर्स’ के संस्थापक माइकल और बीएचयू के पर्यटन व कला इतिहास के विशेषज्ञों ने वर्ष 2025 में यह विशेष सर्वे शुरू किया था।
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सर्वेक्षण के लिए 400 साल पुरानी ‘डाउजिंग कॉपर रॉड्स’ (Dowsing Copper Rods) तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
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बीएचयू के पूर्व भूगोलवेत्ता प्रो. राणा पीबी सिंह की रिसर्च को इस खोज का आधार बनाया गया।
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रिसर्च टीम ने मंदिर, उससे सटे तालाब और आसपास के इलाके में कुल 10 ऊर्जा रेखाओं की मैपिंग की है।
महिला और पुरुष ऊर्जा का अद्भुत संगम
सर्वे में शामिल बीएचयू के डॉ. राणा प्रवीन सिंह के अनुसार, मंदिर में आने वाली इन अदृश्य ऊर्जा रेखाओं को ‘महिला’ और ‘पुरुष’ ऊर्जा में विभाजित किया गया है।
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महिला ऊर्जा: उत्तर दिशा से आने वाली रेखा गर्भगृह तक पहुंचने से पहले देवी माता के एक छोटे मंदिर से होकर गुजरती है।
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पुरुष ऊर्जा: दक्षिण से आने वाली रेखा मंदिर की दीवार पर बने कर्दम ऋषि के विग्रह से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करती है।
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जब शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है, तो ये ऊर्जा रेखाएं सक्रिय होकर फैलती हैं और जल चढ़ाने वाले भक्तों को भी स्पर्श करती हैं।
रॉड पकड़ते ही महसूस हुआ रहस्यमयी दबाव
सर्वे के दौरान जब शोधकर्ता कॉपर रॉड्स लेकर इन ऊर्जा रेखाओं की दिशा में आगे बढ़े, तो रॉड की दिशा अपने आप विपरीत मुड़ गई। दल के सदस्यों ने रॉड पर एक विशेष दबाव और बल महसूस किया।
गर्भगृह में प्रवेश करने पर यह स्पष्ट हुआ कि ये रेखाएं गर्भगृह में प्रवेश करते हुए शिवलिंग के चारों ओर परिक्रमा कर रही हैं।
पंचक्रोशी के अन्य मंदिरों में भी मिले संकेत
कर्दमेश्वर मंदिर के अलावा पंचक्रोशी यात्रा के रामेश्वर और कपिलधारा पड़ाव पर भी ऐसी ही ऊर्जा रेखाओं की पहचान की गई है।
माइकल के अनुसार, इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य मंदिर की स्थापत्य कला, जलस्रोत और भू-आकृतियों के बीच के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक संबंधों को समझना है।
हालांकि, ‘डाउजिंग’ से पहचानी गईं इन ऊर्जा रेखाओं को आधुनिक विज्ञान में पूरी तरह भौतिक ऊर्जा के रूप में स्थापित करने के लिए अभी और प्रयोग किए जाने बाकी हैं।











