बिहार – वजन 50 ग्राम और कीमत 850 करोड़, संदिग्ध रेडियोएक्टिव पदार्थ कैलिफोर्नियम सहित पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

“बिहार के गोपालगंज जिले में बीते शुक्रवार को संदिग्ध रेडियोएक्टिव पदार्थ कैलिफोर्नियम को जब्त किया गया था. वहीं इस मामले के तार अब उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की बात सामने आ रही है. जिसको लेकर पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है”

गोपालगंज 12 / 08 / 2024 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार

बिहार के गोपालगंज जिले में बीते शुक्रवार को संदिग्ध रेडियोएक्टिव पदार्थ कैलिफोर्नियम को जब्त किया गया था। वहीं इस मामले के तार अब उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। जिसको लेकर पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है।

इस बीच कैलिफोर्नियम की जांच करने के लिए शनिवार शाम मुंबई से भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से टीम गोपालगंज पहुंची और जांच शुरू कर दी है। हालांकि मामला संवेदनशील होने की वजह से पुलिस के अधिकारी इस मामले पर खुलकर कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। 

जानकारी के मुताबिक संदिग्ध रेडियोएक्टिव पदार्थ कैलिफोर्नियम की बरामदगी के बाद बिहार एसटीएफ की जांच में उत्तर प्रदेश का भी कनेक्शन सामने आया है।

बताया जा रहा है कि जांच में यूपी के कुशीनगर जिले के खजांची कुशवाहा का नाम इस मामले में सामने आया है। खजांची कुशवाहा ने ही पकड़ में आए तस्करों को रेडियोएक्टिव पदार्थ दिया था।

घटना के बाद से फरार खजांची कुशवाहा के पास रेडियोएक्टिव पदार्थ कहां से आया ये बात जांच का विषय है। जिसका खुलासा करने के लिए पुलिस की टीम यूपी में छापेमारी कर रही है। 

कड़ी सुरक्षा में जेल भेजे गए तस्कर

वहीं इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों तस्करों को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया।  गिरफ्तार में कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थाना क्षेत्र के परसौनी निवासी चंद्रदेव प्रसाद का बेटा छोटेलाल प्रसाद, गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र के कौशल्या चौक निवासी योगेंद्र साह का बेटा चंदन गुप्ता और मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के कुशहर मठिया निवासी हरेंद्र राम का बेटा चंदन राम शामिल है। 

वजन 50 ग्राम और कीमत 850 करोड़, अचानक चर्चा में क्यों है रेडियोएक्टिव कैलिफोर्नियम

पुलिस को एक और झटका तब लगा जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत का अंदाजा लगाया गया। दरअसल, ये वो रेडियोएक्टिव पदार्थ है, जो नाभिकीय विखंडन में काम आता है।

जी हां, अगर इस पदार्थ का सही उपयोग किया जाए तो बिजली से लाखो लोगों के घर रोशन होंगे। गलत हाथों में पड़ जाए तो इंसानी डीएनए बदल देने की क्षमता रखता है।

कैलिफोर्नियम का क्या होता है?

बहुमूल्य पदार्थ कैलिफोर्नियम को लेकर चर्चा हो रही है। आखिर, कैलिफोर्नियम पदार्थ क्या चीज है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? दरअसल, कैलिफोर्नियम एक रेडियोएक्टिव पदार्थ है, जो बहुत ही बहुमूल्य है।

जिसका इस्तेमाल एटॉमिक रिएक्टर में किया जाता है। बताया जाता है कि रेडियोएक्टिव पदार्थ कैलिफोर्नियम इस कदर बेहद महंगा है कि भारत में इसे खरीदना आम आदमी के बस के बाहर की बात है। कैलिफोर्नियम धातु का प्रतीक कफ है। जिसका परमाणु संख्या 98 है।

अमेरिका से बिहार कैसे आया?

ये रेडियोएक्टिव पदार्थ प्राकृतिक नहीं है बल्कि इसे अमेरिका के एक लैब में सिंथेसिस किया गया था। ट्रांसयूरेनियम एलिमेंट्स में से एक कैलिफोर्नियम चांदी के रंग जैसी एक धातु होती है। ये पदार्थ करीब 900 डिग्री सेल्सियस पर पिघलता है।

ये शुद्ध रूप से इतना मुलायम होता है की इसे नॉर्मल ब्लेड से आसानी से काटा जा सकता है। ये पदार्थ उन ट्रांसयूरेनियम एलिमेंट्स में से एक है। जिन्हें इतनी मात्रा में बनाया गया है कि उन्हें खुली आंखों से देखा जा सके।

कैलिफोर्नियम का इस्तेमाल जानिए

इंडस्ट्रियल फील्ड में कैलिफोर्नियम का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से तेल के कुओं में तेल और पानी के लेयर का पता लगाया जाता है। इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर के डिटेक्शन, पोर्टेबल मेटल डिटेक्टर में इसका प्रयोग होता है।

इसका उपयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में भी होता है। मेडिकल सेक्टर में इसका इस्तेमाल कैंसर मरीजों और एक्सरे मशीनों में किया जाता है।

कैलिफोर्नियम एक आइसोटोप CF-252 बेहद ताकतवर न्यूट्रॉन सोर्स होता है। ये न्यूट्रॉन न्यूक्लियर रिएक्टर्स को शुरू करने में मददगार होता है।

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