बिहार / गया समाचार – पितरो के श्राद्ध को फल्गु नदी के तट पर लगा है पिंडदानियों के आस्था का मेला
“इन दिनों पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और संस्कृतियों का महासंगम गयाधाम में पिंडदानियों के आस्था का मेला लगा हुआ है। एक पखवाड़े तक चलने वाले इस मेले के चौथे दिन तक करीब चार लाख पिंडदानियों को गयाधाम में आने की बात बतलाई जा रही है”
गया 20/09/ 2024 शैलेश अम्बष्ठा, जैकी की रिपोर्ट (शब्द )
इन दिनों पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और संस्कृतियों का महासंगम गयाधाम में पिंडदानियों के आस्था का मेला लगा हुआ है। एक पखवाड़े तक चलने वाले इस मेले के चौथे दिन तक करीब चार लाख पिंडदानियों को गयाधाम में आने की बात बतलाई जा रही है।
पिंडदानी गयाधाम के (पांच कोस पंच कोसे गया तीर्थे) में अलग अलग स्थानों पर स्थापित 45 पिंड वेदियों पर अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म काण्ड कर रहे हैं।
देश के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु अपने पितरों के मोक्ष प्राप्ति के निमित पवित्र फल्गु नदी में स्नान, तर्पण, आंचमन, पिंडदान और श्राद्ध कर्म काण्ड में तल्लीन हैं।
झुंड के झुंड पिंडदानी अंदर गया के संकरी गलियों से गुजरते हुए देवघाट पर आकर अपने पूर्वजों के प्रति समर्पण के भाव से कर्मकांड में लीन देखे जा रहे हैं।
एक पखवाड़े तक गया धाम में चलने वाला पितृपक्ष मेला आश्विन मास के कृष्ण प्रतिपदा की तिथि से शुरू होकर पितृ अमावस्या को संपन्न हो जायेगा।
17 सितंबर से 2 अक्तूबर तक मोक्ष की नगरी के रूप में ख्याति प्राप्त विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में एक दिन, तीन दिन, सात दिन, नौ दिन, ग्यारह दिन, तेरह दिन, पंद्रह दिन और सत्रह दिन पिंडदान करने की मान्यता है।
पिंडदानी अपने समर्थ और इच्छा के अनुसार पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध व अन्य कर्मकांड करते हैं। पुनपुन के बाद दूसरे दिन पवित्र फल्गु नदी में तर्पण और पिंडदान किया जाता है। गया में आयोजित पितृपक्ष मेला को लेकर गया की संकरी गलियां गुलजार हो गई है।











