PM Modi speech on Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2026

पराक्रम दिवस 2026: पीएम मोदी ने अंडमान से भरी हुंकार, कहा- ‘आजादी का श्रेय एक परिवार तक सीमित रखा गया’, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और रक्षा निर्यात का किया जिक्र

“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज (23 जनवरी, 2026) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती यानी ‘पराक्रम दिवस’ के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित किया”

नई दिल्ली/पोर्ट ब्लेयर। THE POLITICS AGAIN संतोष सेठ की रिपोर्ट 

इस दौरान पीएम मोदी ने न केवल नेताजी की विरासत को नमन किया, बल्कि पिछली सरकारों पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला।

उन्होंने देश की रक्षा शक्ति, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ करने के महत्व पर विस्तार से बात की।

गणतंत्र उत्सव की नई परंपरा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि 23 जनवरी अब केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के ‘गणतंत्र उत्सव’ की शुरुआत है।

उन्होंने बताया कि 23 जनवरी (पराक्रम दिवस) से लेकर 30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि) तक का सप्ताह देश की भावना का त्योहार बन गया है।

इसमें 26 जनवरी का गणतंत्र दिवस और 29 जनवरी की बीटिंग रिट्रीट भी शामिल है, जो एक नई और भव्य परंपरा का निर्माण कर रहा है।

 

विपक्ष पर साधा निशाना: ‘इतिहास के साथ हुआ अन्याय’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और पिछली सरकारों का नाम लिए बिना उन पर करारा प्रहार किया।

उन्होंने कहा, “आज़ादी के बाद अंडमान और निकोबार के गौरवशाली इतिहास को सहेजा जाना चाहिए था, लेकिन उस समय सत्ता में आए लोगों में असुरक्षा की भावना थी। वे आज़ादी का श्रेय सिर्फ़ एक परिवार तक सीमित रखना चाहते थे।”

पीएम मोदी ने कहा कि इसी राजनीतिक स्वार्थ के चलते देश के वास्तविक इतिहास की उपेक्षा की गई और अंडमान को औपनिवेशिक (गुलामी की) पहचान से बांधकर रखा गया।

अब ‘पोर्ट ब्लेयर’ नहीं, ‘श्री विजयपुरम’ कहिए

प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज गुलामी के प्रतीकों को मिटाया जा रहा है।

उन्होंने गर्व के साथ घोषणा की कि पोर्ट ब्लेयर का नाम अब बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया गया है, जो नेताजी की जीत की याद दिलाता है।

इसके अलावा, उन्होंने रॉस द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप का शहीद द्वीप और हेवलॉक द्वीप का स्वराज द्वीप किए जाने का जिक्र किया।

साथ ही, 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर 21 द्वीपों के नामकरण को सेना के प्रति सर्वोच्च सम्मान बताया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और नया भारत

भारत की बदलती रक्षा नीति पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “21वीं सदी का भारत जानता है कि शक्ति कैसे बनाई जाती है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत ने देश को चोट पहुँचाने वालों के घरों में घुसकर उन्हें खत्म करके पलटवार किया।”

पीएम मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए बताया कि कभी हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज ₹23,000 करोड़ से ज्यादा का रक्षा निर्यात कर रहा है। ब्रह्मोस जैसी मेड-इन-इंडिया मिसाइलें दुनिया का ध्यान खींच रही हैं।

आज़ादी का पहला सूर्योदय और तिरंगा

इतिहास के पन्नों को पलटते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 1947 से बहुत पहले, 30 दिसंबर 1943 को नेताजी ने अंडमान में तिरंगा फहराया था। यह धरती आज़ाद भारत के पहले सूर्योदय की गवाह है।

उन्होंने 2018 में उसी स्थान पर तिरंगा फहराने के अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि उस वक्त ऐसा लगा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के अनगिनत सपने सच हो गए हों।

समारोह में दिग्गजों की मौजूदगी

अंडमान में आयोजित इस कार्यक्रम में उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी (रिटायर्ड), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट के चेयरमैन ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आर. एस. चिकारा और आईएनए के वयोवृद्ध सिपाही व स्वतंत्रता सेनानी लेफ्टिनेंट आर. माधवन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री ने अंत में 1.4 अरब देशवासियों से विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ के मंत्र को अपनाने का आह्वान किया।

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