जौनपुर भूमि अधिग्रहण घोटाला – जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा, फाइलों पर फर्जी हस्ताक्षर कर दिलाते थे मुआवजा

“फाइल फोटो “

“जिले में भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में जालसाजी की जांच के लिए बनी टीम ने 15 दिनों की तफ्तीश के बाद रिपोर्ट दे दी है”

जौनपुर 06 / 09 / 2024 वरुण यादव की रिपोर्ट 

जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर खुलासा हुआ है कि एसडीएम, तहसीलदार और कानूनगो बनकर फाइलों पर फर्जी हस्ताक्षर कर दिलाते जालसाज मुआवजा दिलाते थे।

इसमें तहसीलों से बगैर अभिलेख आए ही सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याप्ति(काला) कार्यालय में तहसील के अधिकारियों की पत्रावली, हस्ताक्षर और मुहर के जरिए भुगतान कर दिया गया।

इसकी जांच पूरी हो गई है, रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि एसडीएम, तहसीलदार और कानूनगो का फर्जी हस्ताक्षर करके मुआवजा दिलाते थे, इसके ऐवज में आरोपी कर्मी मोटा कमीशन वसूलते थे।

जांच सीडीओ की अध्यक्षता में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट इशिता किशोर, एसडीएम ज्ञानप्रकाश यादव कर रहे हैं। इन्होंने सदर, मछलीशहर, मड़ियाहूं, बदलापुर के सभी मुआवजे भुगतान के मामलों की जांच की।

इसमें एक साल के अंदर भुगतान हुए सभी काश्तकारों के भुगतान को चेक किया। इसमें चार काश्तकारों का बयान भी लिया गया। साथ ही आरोपियों का बैंक स्टेटमेंट भी चेक किया गया।

जांच में पाया गया कि 10 ग्राम पंचायत में 20 फर्जी अभिलेखों के जरिए पांच करोड़ का मुआवजा दिया गया। यह सब खेल करीब तीन माह जून, जुलाई और अगस्त से चल रहा था।

एनएच से काश्तकारों का अवार्ड घोषित होता है। इसमें काश्तकारों का नाम जारी किया जाता है। जिसके बाद लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम के माध्यम से रिपोर्ट मंगाते हैं।

इसमें जिस किसी के फाइल विवाद होने के चलते तहसीलों से नहीं आती थी। उन काश्तकारों से बात करके यहीं पर उनकी पत्रावली, हस्ताक्षर मुहर तैयार कर दिया जाता था। इसके बाद भुगतान होता था।

मामले में जिलाधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट मुझे शुक्रवार को प्राप्त होगी, फिलहाल जो साक्ष्य मिले हैं। उसके आधार पर आरोपियों को छोड़ा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.