विश्व रसगुल्ला दिवस : स्वादों में घुलती जिंदगी की मिठास
“हल्के पारदर्शी रस में तैरते नरम रसगुल्लों ने सदियों से विश्व भर के लोगों का दिल जीता है। बंगाली संस्कृति और परंपरा से अटूट रूप से जुड़ा यह मिठास भरा व्यंजन सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि एक भावना है”
कोलकाता 14 / 11 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
लंबे कानूनी संघर्ष के बाद 14 नवंबर 2017 को रसगुल्ले ने अपनी भौगोलिक पहचान (GI) हासिल की थी। तब से हर साल बाल दिवस के साथ-साथ यह दिन विश्व रसगुल्ला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर कोलकाता और इसके उपनगरों में मिठाई घरों में अनोखे स्वादों वाले रसगुल्लों के साथ उत्सव की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। सड़कों पर मुफ्त रसगुल्ला वितरण से लेकर विशेष आयोजनों तक, शहर में उत्साह का माहौल है।
14 स्वादों में रसगुल्ला उत्सव
मशहूर मिठाई निर्माता केसी दास ने 14 नवंबर को 14 विभिन्न स्वादों के रसगुल्लों के साथ विश्व रसगुल्ला दिवस मनाने की योजना बनाई है। संस्था के प्रमुख धीमान दास ने बताया, “हम पारंपरिक सफेद रसगुल्ले के साथ पिस्ता, केला, ब्लैक करंट, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, गंधराज नींबू, पान, अनानास, आम, चॉकलेट, गुड़ और सौंफ जैसे स्वाद पेश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि साल भर रसगुल्ला उपलब्ध रहता है, लेकिन इस दिन ग्राहकों का उत्साह चरम पर होता है। डायबिटीज रोगियों को ध्यान में रखते हुए शुगर-फ्री रसगुल्ले की व्यवस्था भी की गई है। इस मौके पर जीआई रसगुल्लों पर 50 प्रतिशत छूट की घोषणा की गई है, जो कोलकाता के 11 काउंटरों पर उपलब्ध होगी।
मुफ्त वितरण और सामाजिक पहल शहर के कई मिठाई घर मुफ्त रसगुल्ला वितरण और सामाजिक आयोजनों के जरिए इस दिन को यादगार बनाने की तैयारी में हैं। विश्व रसगुल्ला दिवस न केवल मिठास का उत्सव है, बल्कि बंगाली संस्कृति की गौरव गाथा भी है।
मिठाई व्यवसायी इस दिन को धनतेरस और वेलेंटाइन डे की तरह भव्य बनाने की कोशिश में हैं। पुलिस और प्रशासन भी इन आयोजनों में सहयोग कर रहे हैं। यह दिन कोलकाता के लिए मिठास और खुशी का प्रतीक बनकर उभर रहा है।











