विश्व तंबाकू निषेध दिवस: जानिए कैसे धीमा जहर बन रहा है तंबाकू
विश्व तंबाकू निषेध दिवस : तंबाकू एक ‘धीमा जहर’, जानिए कैसे यह खोखला कर रहा है हमारा भविष्य और अर्थव्यवस्था”
नई दिल्ली (स्वास्थ्य डेस्क ) : नीतू कौशल की रिपोर्ट
तंबाकू आज दुनिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है।
हर साल लाखों लोग तंबाकू सेवन से होने वाली जानलेवा बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। समाज को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और इसके सेवन को कम करने के उद्देश्य से हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 1987 में शुरू की गई यह पहल केवल एक जागरूकता अभियान नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण का वैश्विक संकल्प है।
तंबाकू: एक ‘धीमा जहर’ (Slow Poison)
तंबाकू को अक्सर “धीमा जहर” कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है।
बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, सिगार, खैनी, गुटखा और पान मसाला जैसे रूपों में तंबाकू का सेवन किया जाता है।
निकोटीन की लत: तंबाकू में मौजूद ‘निकोटीन’ (Nicotine) अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला तत्व है।
बीमारियों का घर: इसमें हजारों हानिकारक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से कई सीधे कैंसर का कारण बनते हैं।
तंबाकू का सेवन फेफड़ों के कैंसर, मुंह और गले के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप (High BP) जैसी गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण है।
भारत में तंबाकू सेवन की चिंताजनक स्थिति
भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है जहां तंबाकू का सेवन व्यापक स्तर पर होता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में धूम्रपान और बिना धुएं वाले (Chewing Tobacco) तंबाकू उत्पादों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि युवाओं और किशोरों के बीच तंबाकू उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
जिज्ञासा, साथियों का दबाव (Peer Pressure), और आकर्षक विज्ञापन युवाओं को इसकी ओर खींच रहे हैं।
निष्क्रिय धूम्रपान (Second Hand Smoke) भी है जानलेवा
तंबाकू का नुकसान केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद लोग, विशेषकर बच्चे और गर्भवती महिलाएं, इसके धुएं के संपर्क में आकर निष्क्रिय धूम्रपान (Second Hand Smoke) का शिकार बनते हैं। इससे उनमें भी फेफड़ों की बीमारियां और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
तंबाकू केवल स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह देश और परिवारों की अर्थव्यवस्था को भी भारी चोट पहुंचाता है:
तंबाकू से होने वाली बीमारियों के लंबे और महंगे इलाज पर परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है।
समय से पहले मृत्यु और बीमारी के कारण देश की उत्पादकता (Productivity) में कमी आती है, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है।
तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकार के कड़े कदम
भारत सरकार ने तंबाकू नियंत्रण के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं:
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध।
तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग पर बड़े और डरावने चेतावनी चित्र (Graphic Warnings)।
शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक।
तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स लगाना ताकि लोग इसे खरीदने से बचें।
तंबाकू छोड़ना क्यों है जरूरी? (Benefits of Quitting)
तंबाकू छोड़ने का निर्णय किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे अच्छा स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हो सकता है।
तंबाकू छोड़ने के कुछ ही घंटों के भीतर शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं। रक्तचाप और हृदय गति सामान्य होने लगती है।
कुछ महीनों में फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Capacity) में सुधार दिखाई देने लगता है।
लंबे समय तक तंबाकू से दूरी बनाए रखने पर कैंसर और हृदय रोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
समाज और परिवार की भूमिका
एक तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि माता-पिता स्वयं तंबाकू से दूर रहें, तो वे बच्चों के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश कर सकते हैं।
निष्कर्ष :
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यह याद दिलाता है कि तंबाकू से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
तंबाकू छोड़ना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम है।
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