प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी के तहत महिलाओं का सशक्तीकरण; अब तक सौंपे गए 1 करोड़ से अधिक मकान महिलाओं के नाम पर या उनके संयुक्त स्वामित्व में पंजीकृत हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U): 1.25 करोड़ घरों की स्वीकृति, ‘PMAY-U 2.0’ से समावेशी विकास और महिला सशक्तीकरण को मिली नई उड़ान”
नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
“एक सुरक्षित और स्थायी घर गरिमापूर्ण जीवन की नींव होता है।” इसी विजन के साथ जून 2015 में शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी’ (PMAY-U) ने देश में शहरी विकास और किफायती आवास की परिभाषा को पूरी तरह से बदल दिया है।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG), मध्यम आय वर्ग (MIG) और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले शहरी परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराना है।
इस योजना की अपार सफलता और बढ़ती आवासीय मांग को देखते हुए सरकार ने सितंबर 2024 में इसका पुनर्गठित और उन्नत संस्करण ‘PMAY-U 2.0’ लॉन्च किया है, जो 2029 तक चलेगा।
आंकड़े बताते हैं कि 2005 से 2014 के बीच पूर्ववर्ती योजनाओं में केवल 8 लाख शहरी मकान बने थे। जबकि, 9 अगस्त 2026 तक PMAY-U और 2.0 के तहत कुल 1.25 करोड़ मकान स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 1 करोड़ से अधिक मकान बनकर लाभार्थियों को सौंपे भी जा चुके हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस योजना ने महिलाओं को मालिकाना हक देकर उनका सशक्तीकरण किया है।
सौंपे गए 1 करोड़ से अधिक घरों में से 1 करोड़ घर सीधे तौर पर महिलाओं के नाम पर या उनके संयुक्त स्वामित्व में पंजीकृत हैं।
PMAY-U 2.0 का लक्ष्य अगले 5 वर्षों (2024-2029) में 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है।
इसमें प्रति इकाई अधिकतम ₹2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके चार प्रमुख घटक हैं:
लाभार्थी-आधारित निर्माण (BLC): EWS परिवारों को अपनी जमीन पर 45 वर्ग मीटर तक का नया मकान बनाने के लिए ₹2.5 लाख तक की मदद।
साझेदारी में किफायती आवास (AHP): घर खरीदने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रति यूनिट ₹2.5 लाख तक की आर्थिक मदद देती हैं।
किफायती किराये का आवास (ARH): प्रवासी श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों, कामकाजी महिलाओं और बेघर लोगों के लिए सम्मानजनक और स्वच्छ किराये के आवास की सुविधा।
ब्याज सब्सिडी योजना (ISS): 1 सितंबर 2024 के बाद लिए गए गृह ऋण (Home Loan) पर EWS, LIG और MIG परिवारों को अधिकतम ₹1.80 लाख तक की ब्याज सब्सिडी।
EWS: वार्षिक आय ₹3 लाख तक।
LIG: वार्षिक आय ₹3 लाख से ₹6 लाख तक।
MIG: वार्षिक आय ₹6 लाख से ₹9 लाख तक।
भ्रष्टाचार और देरी को रोकने के लिए योजना को पूरी तरह से तकनीक-सक्षम बनाया गया है। ‘PMAY-U 2.0 एकीकृत वेब पोर्टल’ के जरिए आवेदन से लेकर फंड रिलीज तक सब कुछ ऑनलाइन है।
‘जियो-टैगिंग’ (Geo-tagging) के जरिए मकान के निर्माण को पांच अलग-अलग चरणों में ट्रैक किया जाता है।
इसके अलावा, ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज (GHTC-India) के तहत 6 शहरों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट (LHP) भी बनाए गए हैं, जो तेजी से और आपदा-रोधी मकान बनाने की नई तकनीक प्रदर्शित करते हैं।
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