संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस और चीन के वीटो से ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल बढ़ाने का अमेरिकी प्रस्ताव गिर गया।
UNSC में ईरान को लेकर अमेरिका बनाम रूस-चीन टकराव: वीटो से गिरा अमेरिकी प्रस्ताव, परमाणु निगरानी को लगा बड़ा झटका”
न्यूयॉर्क: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़ी कूटनीतिक दरार खुलकर सामने आ गई है।
गुरुवार को रूस और चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर अमेरिका के उस अहम प्रस्ताव को गिरा दिया,
जिसमें ईरान पर लगे संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले ‘विशेषज्ञों के पैनल’ का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने की मांग की गई थी।
अमेरिका द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने वोट किया था, जबकि सोमालिया और पाकिस्तान ने मतदान प्रक्रिया से दूरी (Abstain) बनाई।
हालांकि, परिषद के स्थायी सदस्य रूस और चीन के वीटो के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
अमेरिका चाहता था कि स्वतंत्र विशेषज्ञों का यह पैनल ईरान पर लगे प्रतिबंधों (हथियार खरीद-बिक्री, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करना) की कड़ाई से निगरानी जारी रखे, ताकि ईरान और उसके सहयोगियों के बीच किसी भी प्रतिबंधित गतिविधि को रोका जा सके।
अमेरिका का पक्ष: अमेरिका की उप राजदूत जेनिफर लोसेटा ने कहा कि रूस और चीन के वीटो से उन्हें हैरानी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि पैनल के बिना सुरक्षा परिषद को प्रतिबंधों के उल्लंघन की निष्पक्ष जानकारी नहीं मिल सकेगी, जिसका सीधा फायदा ईरान को होगा।
रूस का तर्क: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिकी प्रस्ताव को ही गैरकानूनी करार दिया। उनका तर्क है कि 2015 के परमाणु समझौते के ‘स्नैपबैक’ (Snapback) प्रावधान के तहत 2025 में ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाना ही गलत था, इसलिए निगरानी पैनल का कार्यकाल बढ़ाना भी अवैध है।
ईरान की प्रतिक्रिया: प्रस्ताव गिरने पर ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने रूस और चीन को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने UNSC के राजनीतिकरण की अमेरिकी कोशिश को नाकाम कर दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वैश्विक चिंताएं चरम पर हैं।
2025 में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर कथित हमलों के बाद, संयुक्त राष्ट्र (IAEA) के निरीक्षक ईरान के यूरेनियम भंडार की सटीक पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
IAEA के अनुसार, ईरान के पास 60% तक समृद्ध 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार था, जो हथियार बनाने लायक (90%) शुद्धता से मात्र एक कदम पीछे है।
इस वीटो ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के मुद्दे पर दुनिया की महाशक्तियां अब पूरी तरह से दो गुटों में बंट चुकी हैं, जिससे मध्य पूर्व की स्थिरता पर और खतरा मंडराने लगा है।
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