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विश्व पर्यावरण दिवस: पीएम मोदी ने देश को दी शुभकामनाएं

“विश्व पर्यावरण दिवस: पीएम मोदी ने देशवासियों को दी शुभकामनाएं, संस्कृत श्लोक साझा कर दिया ‘हरित भारत’ का संदेश “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (World Environment Day) के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित सभी योद्धाओं की सराहना की है।

 

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने प्रकृति संरक्षण के महत्व को दर्शाने वाला एक प्राचीन संस्कृत श्लोक साझा किया और भारत की समृद्ध जैविक विविधता व सतत विकास (Sustainable Development) के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।

वन्यजीवों के संरक्षण और हरित आवरण में ऐतिहासिक वृद्धि

प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में सरकार और आम जनमानस द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति की है:

  • विशेष प्रजातियों का संरक्षण: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए (Snow Leopards), रीछ और चीतों के संरक्षण के सफल प्रयासों ने साबित किया है कि निरंतर प्रतिबद्धता से पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से बहाल किया जा सकता है।

  • ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान: पीएम मोदी ने बताया कि इस अनूठी पहल ने देश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके तहत हर साल लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जुड़ रहा है।

‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) और जनभागीदारी

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लोगों ने सामूहिक प्रयासों, मजबूत नीतियों, विज्ञान में विश्वास और नवाचार (Innovation) के दम पर पर्यावरण में शानदार सुधार किया है।

उन्होंने कहा कि भारत ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ के सिद्धांत से प्रेरित है। देश ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली) की भावना के साथ एक स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ दुनिया बनाने की दिशा में अपना काम जारी रखेगा।

संस्कृत श्लोक के जरिए प्रकृति वंदना

पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति का संरक्षण भारत के सांस्कृतिक लोकाचार और पारंपरिक ज्ञान का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने अपने संदेश को सुदृढ़ करने के लिए यह श्लोक साझा किया:

“मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥“

अर्थ: हमारे चारों ओर वायु आनंददायक और कल्याणकारी रूप से प्रवाहित हो, नदियां जीवनदायिनी और पोषणकारी जल प्रदान करें और जड़ी-बूटियां व वनस्पतियां सभी जीवित प्राणियों के लिए आरोग्य और सुख का कारण बनें।

Santosh SETH

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