Women Representation in Parliament

महिला आरक्षण 2026: जानिए लोकसभा और विधानसभाओं में कितनी है महिलाओं की हिस्सेदारी?

महिला आरक्षण बिल 2026: 33% कोटे की तैयारी के बीच जानिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की मौजूदा जमीनी हकीकत

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत में महिला सशक्तिकरण और राजनीति में उनकी भागीदारी को लेकर एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है।

केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल) को लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक 2026’ सहित तीन अहम बिल पेश कर दिए हैं।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना और उसमें महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करना है।

लोकसभा के बाद यही प्रक्रिया राज्यों की विधानसभाओं में भी दोहराई जाएगी। लेकिन, 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से पहले, यह जानना बेहद जरूरी है कि वर्तमान में लोकसभा और देश की विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या है।

मौजूदा 18वीं लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व (आंकड़ों में)

वर्तमान 18वीं लोकसभा (2024 चुनाव) में कुल 543 सांसदों में से केवल 75 महिला सांसद (लगभग 14%) ही चुनकर संसद पहुंची हैं।

राजनीतिक दल महिला सांसदों की संख्या
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 31
कांग्रेस (INC) 13
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 11

अनुपात के लिहाज से TMC सबसे आगे, BJP पिछड़ी

आंकड़ों में भले ही भाजपा की महिला सांसद सबसे ज्यादा हों, लेकिन यदि पार्टी द्वारा कुल जीते गए सांसदों में महिलाओं के अनुपात (Ratio) को देखा जाए, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) सबसे आगे है।

वहीं, इस आनुपातिक मामले में भाजपा काफी पिछड़ी हुई है। एक अहम तथ्य यह भी है कि 2024 के चुनाव में केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की महिला उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की है; किसी भी निर्दलीय या गैर-मान्यता प्राप्त दल की महिला उम्मीदवार को जीत नहीं मिली।

वैश्विक मंच पर कहां खड़ा है भारत?

अगर बड़े लोकतांत्रिक देशों से तुलना की जाए, तो भारतीय संसद में महिलाओं का मौजूदा 14% प्रतिनिधित्व काफी कम है:

  • दक्षिण अफ्रीका: 46% महिला सांसद

  • ब्रिटेन (UK): 40-41% महिला सांसद

  • अमेरिका (USA): दोनों सदनों में 25% से ज्यादा महिला सांसद

ADR रिपोर्ट: टिकट बंटवारे में महिलाओं को कितना मौका मिला?

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण के अनुसार, महिला उम्मीदवारों को टिकट देने में राजनीतिक दल काफी कंजूसी दिखाते रहे हैं:

1. लोकसभा चुनाव 2024 की स्थिति:

  • कुल 8,360 उम्मीदवारों में से महज 800 महिलाएं (9.60%) थीं।

  • 543 में से 152 लोकसभा सीटों (करीब 28%) पर एक भी महिला प्रत्याशी मैदान में नहीं थी।

  • राष्ट्रीय दलों का हाल: भाजपा ने 16% महिलाओं को टिकट दिया। कांग्रेस और माकपा ने 13-13%, बसपा ने 8% महिलाओं को मौका दिया। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारी थी।

2. विधानसभाओं की स्थिति (ADR 2026 रिपोर्ट):

एडीआर की 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी स्थिति निराशाजनक है:

  • देश भर के कुल 43,348 उम्मीदवारों में से केवल 4,295 (10%) महिला उम्मीदवार थीं।

  • 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में से 1,698 (41%) निर्वाचन क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार ने चुनाव नहीं लड़ा।

  • सबसे अच्छा प्रदर्शन: दिल्ली (14%), ओडिशा (14%), छत्तीसगढ़ (13%), उत्तर प्रदेश (13%) और त्रिपुरा (12%)।

  • सबसे खराब प्रदर्शन: नगालैंड (2%), अरुणाचल प्रदेश (5%) और जम्मू-कश्मीर (5%)।

(निष्कर्ष: इन आंकड़ों से साफ है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लागू होने से राजनीतिक दलों की यह मजबूरी हो जाएगी कि वे महिलाओं को राजनीति में उचित और 33 फीसदी की सुनिश्चित हिस्सेदारी दें।)

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