महिला वनडे वर्ल्ड कप : टीम इंडिया बनी वर्ल्ड चैंपियन, जानिए विजयी बेटियों की कहानी
“महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। इस मैच में भारत ने साउथ अफ्रीका के सामने 299 का टारगेट रखा था”
मुंबई 03 / 11 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल भारत और साउथ अफ्रीका के बीच डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। इस मैच में टीम इंडिया ने 52 रन से जीत दर्ज की। इसके साथ ही टीम इंडिया ने पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया।
इस मैच में टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी करने का मौका मिला और उन्होंने 50 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 298 रन बनाए। जवाब में अफ्रीकी टीम इस मैच में 246 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। भारत की तरफ से इस मैच में शैफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा ने अर्धशतक लगाया।
भारत की तरफ से शैफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा ने अर्धशतक लगाया
पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को शैफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी हुई। स्मृति ने 58 गेंद में 45 रन बनाए। शेफाली वर्मा के पास इस मैच में शतक लगाने का मौका था लेकिन उन्होंने इस मौके को गंवा दिया।
शेफाली ने 78 गेंद में 87 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में सात चौके और दो छक्के लगाए। सेमीफाइनल मैच मैच में शतक लगाने वाली जेमिमा 37 गेंद में 24 रन ही बना सकीं।
कप्तान हरमनप्रीत कौर 29 गेंद में 20 रन बनाकर क्लीन बोल्ड हुईं। अमनजोत ने 14 गेंद में 12 रन बनाए। ऋचा घोष ने 34 रन बनाए। दीप्ति शर्मा 58 के स्कोर पर रन आउट हुईं। साउथ अफ्रीका की तरफ से आयबोंगा खाका ने 3 विकेट लिए।
साउथ अफ्रीकी कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट की शतकीय पारी गई बेकार
लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका को भी इस मैच में अच्छी शुरुआत मिली। पहले विकेट के लिए तैजमिन ब्रिट्स और लौरा वूल्वार्ट 51 रन की पार्टनरशिप हुई। ब्रिट्स इस मैच में 35 गेंदों में 23 रन बनाकर आउट हुई।
नंबर 3 पर बैटिंग करने के लिए आई एनेक बॉश इस मैच में खाता भी नहीं खोल सकीं। इसके बाद सुने लुस 35, सिनालो जाफा ने 16 रन बनाए। जहां साउथ अफ्रीका के बाकी बल्लेबाज इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए वहीं कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट ने शानदार शतक लगाया।
वह 98 गेंदों में 11 चौके और एक सिक्स की मदद से 101 रन बनाकर आउट हुईं। अमनजोत कौर ने उनका शानदार कैच लपका। गेंदबाजी की बात करें तो भारत की तरफ से दीप्ति शर्मा ने सबसे ज्यादा 5 विकेट लिए।
जानिए उन बेटियों की कहानी जिन्होंने देश को पहली बार खिताब दिलाया
टीम ने मेहनत, जज्बे और विश्वास से वो मुकाम छू लिया है, जिसका सपना करोड़ों भारतीयों ने देखा था। मंधाना की चमक से लेकर रेणुका की रफ्तार तक, हर खिलाड़ी की अपनी एक कहानी है, जो संघर्ष, हिम्मत और उम्मीदों से बुनी गई है। आइए जीत की नायिका 11 खिलाड़ियों के बारे में जानते हैं…
स्मृति मंधाना
शेफाली वर्मा
जेमिमा रॉड्रिग्स
हरमनप्रीत कौर
अमनजोत कौर
मोहाली की रहने वाली अमनजोत ने पंजाब के संगरूर जिले से क्रिकेट का सफर शुरू किया। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन पिता की हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ाया। अब वे भारत की मिडिल ऑर्डर की मजबूती हैं और अपनी सटीक स्ट्रोक्स से गेम बदलने की काबिलियत रखती हैं।
दीप्ति शर्मा
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की दीप्ति शर्मा टीम की सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर हैं। उन्होंने अपने भाई के साथ अभ्यास करते हुए क्रिकेट सीखा। उनका धैर्य और गेंदबाजी में नियंत्रण भारत की जीत का बड़ा हथियार है।
ऋचा घोष
पश्चिम बंगाल की ऋचा घोष मैदान पर जोश की प्रतीक हैं। पिता खुद क्रिकेट कोच हैं। 16 साल की उम्र में उन्होंने भारत के लिए खेलना शुरू किया। उनकी हिटिंग क्षमता और विकेट के पीछे फुर्ती ने उन्हें टीम का अपरिहार्य हिस्सा बना दिया है।
राधा यादव
मुंबई की धारावी झुग्गियों से निकलकर राधा यादव ने ऐसा सफर तय किया, जो प्रेरणा बन गया। बाएं हाथ की यह स्पिनर अपनी विविधता से किसी भी बल्लेबाज़ को उलझा देती हैं। बचपन में दूध बेचने वाले परिवार की बेटी आज करोड़ों दिलों की प्रेरणा है।
क्रांति गौड़
मध्य प्रदेश की क्रांति गौड़ कभी नेट बॉलर थीं। पिता की नौकरी छूटने के बाद घर चलाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वही क्रांति भारत की तेज़ गेंदबाज़ी की नई पहचान हैं और गरीब परिवार की उम्मीद की मिसाल भी।
श्री चरणी
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से आने वाली श्री चरणी ने खो-खो और बैडमिंटन खेलते हुए क्रिकेट को अपनाया। गांव की धूल भरी पिच से अब विश्व कप फाइनल तक, उनका सफर अद्भुत रहा है। उन्होंने WPL में अपनी प्रतिभा से सबको चौंकाया और अब देश के लिए खेल रही हैं।
रेणुका ठाकुर
हिमाचल के छोटे से गाँव पार्सा की रेणुका ठाकुर की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। पिता की मौत के बाद माँ ने उन्हें अकेले पाला। एचपीसीए अकादमी में ट्रेनिंग लेकर उन्होंने तेज गेंदबाजी को अपना हथियार बनाया और अब भारत की पेस अटैक की रीढ़ हैं।
ये हैं भारत की 11 बेटियां, जिन्होंने मेहनत से अपनी तकदीर लिखी है। इन बेटियों ने इतिहास रच दिया है और साबित कर दिया है- जब बेटियां खेलती हैं, तो देश जीतता है।
इसमें प्रतिका रावल का नाम न जोड़ना नाइंसाफी होगी। भारतीय टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उनका फॉर्म शानदार रहा।
विश्व विजेता बेटियों को पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ICC महिला विश्व कप फाइनल जीतने पर भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, “ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फाइनल में भारतीय टीम की शानदार जीत।
फाइनल में उनका प्रदर्शन अद्भुत कौशल और आत्मविश्वास से भरा था। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण टीम वर्क और दृढ़ता दिखाई। हमारे खिलाड़ियों को बधाई। यह ऐतिहासिक जीत भविष्य की चैंपियन टीमों को खेलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।
इसके अलावा पूरे देशभर में जश्न का माहौल है.लोग जमकर जश्न मना रहे हैं। टीम इंडिया के प्रशंसकों ने पटाखे फोड़कर एक दूसरे बधाई दे रहे हैं। इतना ही गृहमंत्री अमित शाह,केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने विश्व विजेता बेटियों को बधाई दी है











