हिंदू नव वर्ष चैत्र नवरात्रि

हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि 2026: महत्व, घटस्थापना और पूजा विधि

19 मार्च से हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ : जानें कलश स्थापना, शक्ति साधना और नवसंवत्सर का पौराणिक व सांस्कृतिक महत्व

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

भारतीय कालगणना और सनातन परंपरा के सबसे पवित्र दिनों में से एक, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च से शुरू हो रही है।

इसी पावन दिन से हिंदू नव वर्ष (नवसंवत्सर) और शक्ति की आराधना के महापर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ का शुभारंभ होता है।

भारतीय संस्कृति में यह दिन नई ऊर्जा, नवसृजन और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसके मूल में प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है।

हिंदू नव वर्ष: सृष्टि के आरंभ का दिन

हिंदू नव वर्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना गया है। पुराणों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था।

इसी पावन तिथि से भारत की प्राचीन कालगणना प्रणाली ‘विक्रम संवत’ का भी आरंभ होता है। भारत की विविधता को दर्शाते हुए इसे कई राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है:

  • महाराष्ट्र: गुड़ी पड़वा

  • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश: उगादी

  • उत्तर भारत: हिंदू नव वर्ष या नवसंवत्सर

प्रकृति में नवसृजन का संकेत

यह समय प्रकृति में भी बड़े बदलाव का संकेत लेकर आता है। वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है, चारों ओर हरियाली और फूलों की बहार दिखाई देती है।

पेड़ों पर नई पत्तियां निकलती हैं और मौसम सुखद हो जाता है। इसी कारण हिंदू नव वर्ष को केवल एक कैलेंडर की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मानव के तालमेल और संतुलन का प्रतीक भी माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि: 9 दिनों का शक्ति और भक्ति उत्सव

हिंदू नव वर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

  • घटस्थापना: नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: यह पर्व संदेश देता है कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का कितना अधिक महत्व है। देवी शक्ति की आराधना से लोग अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लेते हैं।

राम नवमी और कन्या पूजन के साथ समापन

चैत्र नवरात्रि का समापन नौवें दिन ‘राम नवमी’ के साथ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ था।

नवरात्रि के अंतिम दिनों में कन्या पूजन की महान परंपरा भी निभाई जाती है, जहां छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। यह परंपरा स्त्री शक्ति के प्रति अगाध सम्मान और आदर का प्रतीक है।

नवरात्रि पर्व की शुरुआत कलश स्थापना के साथ ही होती है। भक्त नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में विधिवत कलश स्थापित करते हैं और फिर नौ दिनों तक इसकी पूजा करते हैं।

फिर दसवें दिन इसे विसर्जित कर दिया जाता है। कलश स्थापना को ही घटस्थापना भी कहा जाता है। इसके बिना नवरात्रि पर्व अधूरा माना जाता है।

चलिए जानते हैं नई दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई समेत देश के तमाम शहरों में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

कलश स्थापना मुहूर्त 2026 (Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2026)

शहर का नाम कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2026
नई दिल्ली 06:52 AM से 07:43 AM और 12:05 PM से 12:53 PM
मुंबई  06:52 AM से 08:08 AM और 12:22 PM से 01:11 PM
कोलकाता  06:52 AM से 09:44 AM और 11:20 AM से 12:09 PM
नोएडा  06:52 AM से 07:42 AM और 12:05 PM से 12:53 PM
बेंगलुरु 06:52 AM से 07:53 AM और 12:03 PM से 12:52 PM
लखनऊ 06:52 AM से 10:13 AM और 11:20 AM से 12:28 PM
पटना 06:52 AM से 09:57 AM और 11:33 AM से 12:22 PM
अहमदाबाद  06:52 AM से 08:06 AM और 12:23 PM से 01:12 PM
जयपुर 06:52 AM से 07:50 AM और 12:11 PM से 12:59 PM
पुणे  06:52 AM से 08:04 AM और 12:18 PM से 01:07 PM
कानपुर 06:52 AM से 10:16 AM और 11:52 AM से 12:41 PM
नागपुर  06:52 AM से 07:41 AM और 11:57 AM से 12:46 PM
चेन्नई  06:52 AM से 07:42 AM और 11:53 AM से 12:41 PM
हैदराबाद  06:52 AM से 07:47 AM और 12:00 PM से 12:48 PM
गाजियाबाद  06:52 AM से 07:42 AM और 12:04 PM से 12:52 PM
लुधियाना  06:52 AM से 07:46 AM और 12:10 PM से 12:59 PM
चंडीगढ़  06:52 AM से 07:43 AM और 12:07 PM से 12:55 PM
जम्मू-कश्मीर 06:52 AM से 07:48 AM और 12:14 PM से 01:03 PM
वाराणसी 06:52 AM से 10:05 AM और 11:42 AM से 12:30 PM
गुरुग्राम 06:52 AM से 07:44 AM और 12:06 PM से 12:54 PM
गोरखपुर  06:52 AM से 10:04 AM और 11:40 AM से 12:29 PM
देहरादून 06:52 AM से 10:25 AM और 12:02 PM से 12:50 PM
कोटा  06:52 AM से 07:51 AM और 12:10 PM से 12:59 PM
बरेली  06:52 AM से 10:19 AM और 11:56 AM से 12:44 PM

 

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा।

प्रतिपदा तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। चैत्र नवरात्रि के दिन घटस्थापना के लिए मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से सुबह 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

घटस्थापना अभिजित मुहूर्त 19 मार्च को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना (घटस्थापना) विधि 

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद घर और मंदिर हर जगह गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें।

घर की उत्तर-पूर्व दिशा या मंदिर कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी का पात्र लें और उसमें मिट्टी डालकर जौ बोएं।

फिर तांबे या मिट्टी का कलश लें और उसके मुख पर कलावा बांध लें। फिर उसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें। 

कलश में 5 आम के पत्ते चारों तरफ से रखें। आम की जगह अशोक के पत्ते भी रख सकते हैं। कलश के ऊपर एक जटा वाला नारियल रखें।

नारियल पर कलावा बांधकर ही कलश पर रखें। या फिर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर भी रख सकते हैं। इसके बाद कलश की विधि विधान पूजा करें।

फिर हाथ में जल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। नवरात्रि के  नौ दिनों तक देवी दुर्गा के साथ-साथ कलश की भी पूजा करें।

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