वक्फ संशोधन बिल : पुराने बिल से नया बिल कैसे अलग… समझिए पूरी बात

“लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वक्फ संशोधन विधेयक डिस्टिंक्शन के साथ पास हो गया। मोदी सरकार के इस विधेयक को जिस तरह लोकसभा में सपोर्ट मिला ठीक उसी तरह राज्यसभा में भी हाथों-हाथ लिया गया और अब वक्फ संशोधन विधेयक कानून बनने से बस एक कदम दूर है। जैसे ही इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगेगी, ये देश भर में लागू हो जाएगा”

नई दिल्ली 01 / 01 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

वक्फ संशोधन बिल को संसद ने पास कर दिया है। पहले लोकसभा और अब राज्यसभा से भी संशोधन विधेयक पास हो गया है। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा जहां से दस्तखत होते ही बिल कानून बन जाएगा और पुराना वक्फ बिल इतिहास बन जाएगा। विपक्ष के सैकड़ों संशोधनों और गरमागरम बहस के बाद आखिरकार ये विधेयक राज्यसभा में भी पास हो गया है।

राज्यसभा में बिल के समर्थन में 128 सांसदों ने वोट दिया और विरोध में 95 वोट पड़े। राज्यसभा में करीब 12 घंटे इस बिल पर बहस हुई लेकिन आखिरकार जीत सरकार की हुई और विपक्ष का सारा प्लान एक बार फिर फेल हो गया। अब ये बिल किसी भी वक्त राष्ट्रपति के पास दस्तखत के लिए भेजा जाएगा। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

पुराने वक्फ बिल से नया बिल कैसे अलग?

  1. दरअसल, वक्फ अधिनियम की धारा 40 वक्फ बोर्ड को ये तय करने का अधिकार देती थी कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं। साथ ही ये भी ताकत देती थी कि ऐसे मामलों में वक्फ बोर्ड का फैसला अंतिम होगा, जब तक कि इसे वक्फ ट्रिब्यूनल रद्द या संशोधित ना कर दे

  2. लेकिन अब नये कानून में ये विवादित धारा 40 खत्म कर दी गई है, वक्फ बोर्ड के अधिकारों में दी गई ये असीमित ताकत खत्म कर दी गई है।

  3. पुराना कानून वक्फ ट्रिब्यूनल को भी शक्तिशाली बनाता था, क्योंकि अभी तक कानून ये था कि अगर किसी जमीन पर विवाद है तो वक्फ ट्रिब्यूनल में वो केस जाता था और वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी माना जाता था। यानी वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को किसी भी दूसरी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। लेकिन अब नये कानून के मुताबिक वक्फ ट्रिब्यूनल की इस असीमित ताकत में कटौती कर दी गई है, अब वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं होगा, उसे भी चुनौती दी जा सकेगी।

  4. पहले के कानून में था कि कोई भी वक्फ को जमीन दान कर सकता था, लेकिन अब दानदाता के मुसलमान होने की शर्त है। नये बिल के मुताबिक जो व्यक्ति वक्फ के लिए ज़मीन दान कर रहा है, उसे कम से कम 5 साल से मुसलमान होना अनिवार्य होगा।

  5. इसके अलावा पहले के कानून में सरकारी जमीन को वक्फ से छूट नहीं थी। सरकारी जमीन भी वक्फ मान ली जाती थी, लेकिन अब नये कानून के मुताबिक सरकारी जमीन को वक्फ नहीं माना जाएगा। अगर कोई सरकारी ज़मीन गलती से वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज हो गई हो, तो अब उसे वक्फ नहीं माना जाएगा ऐसे मामलों में अब फैसला जिलाधिकारी (कलेक्टर) करेंगे, न कि वक्फ बोर्ड।

  6. इन्हीं बातों पर सदन में विपक्ष ने खूब हंगामा किया क्योंकि जाहिर तौर पर इस कानून का फायदा आम मुसलमानों को मिलेगा जिनकी जमीनों से कब्जा छूटेगा। लेकिन विपक्ष कहता रहा कि सरकार वक्फ बोर्ड को अब सरकारी अधिकारियों के हवाले कर देगी जिससे नुकसान ही होगा। संसद से लेकर सड़क तक तमाम विरोध के बाद वक्फ संशोधन बिल संसद से पास होने के बाद पुराना वक्फ कानून अब इतिहास बन गया है।  

Santosh Kumar

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