उपराष्ट्रपति ने NDC में दिया ‘विकसित भारत 2047’ का मूल मंत्र
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का NDC में संबोधन: ‘भारत का लक्ष्य प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है’
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। उनका संबोधन “भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य” विषय पर केंद्रित था।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan addressed the 66th Course of the National Defence College in New Delhi, emphasising that national strategy must translate national purpose into action and national intent into tangible outcomes. He stated that India’s ambition to emerge as a leading global power is not to dominate others, but to ensure that no country dictates terms to it. He underscored that every sovereign nation, big or small, deserves equal respect and that no country should encroach upon another’s territorial boundaries.
— Vice-President of India (@VPIndia) October 12, 2026
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने 122 प्रतिभागियों (जिनमें भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ-साथ मित्र विदेशी देशों के 41 अधिकारी शामिल थे) को संबोधित करते हुए समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक सोच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ और भारत के राष्ट्रीय मूल्य
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रीय मूल्य उसकी पहचान की आधारशिला होते हैं। उन्होंने भारत के प्राचीन सभ्यतागत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) का उल्लेख करते हुए इसे भारत की विदेश नीति का मूल बताया।
उन्होंने इसके व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा:
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कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल।
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आपदाओं के दौरान ‘प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता’ (First Responder) के रूप में भारत की भूमिका।
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जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय पहलों में भारत का नेतृत्व।
राष्ट्रीय सुरक्षा और 5 प्रमुख प्राथमिकताएं
श्री राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना है, लेकिन इसका उद्देश्य दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करना या अपनी शर्तें थोपना बिल्कुल नहीं है।
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य देश भारत पर अपनी अनैतिक शर्तें न थोप सके।
उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पांच व्यापक प्राथमिकताओं पर बल दिया:
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भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना।
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देश के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय स्वरूप को बनाए रखना।
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रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उद्देश्यों को मजबूती से आगे बढ़ाना।
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मानव विकास के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना।
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अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता में सक्रिय योगदान देना।
विकसित भारत 2047 और ग्लोबल साउथ की चुनौतियां
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ संरेखित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में भूमि, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा को भी शामिल किया।
उपराष्ट्रपति ने ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के साथ मजबूत जुड़ाव का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और नवाचार में सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
साथ ही, उन्होंने विकासशील देशों के सामने ‘भ्रष्टाचार’ को एक बड़ी चुनौती बताया और इसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की।
संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने भावी रणनीतिक नेताओं से संस्थागत सीमाओं से परे जाकर एक एकीकृत और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता, संकाय सदस्य और 66वें एनडीसी पाठ्यक्रम के प्रतिभागी भी उपस्थित रहे।
📊 उपराष्ट्रपति का NDC में अहम संबोधन (एक नज़र में)
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मुख्य बिंदु (Key Highlights) |
विस्तृत जानकारी (Details) |
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📍 आयोजन स्थल |
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC), नई दिल्ली (66वां पाठ्यक्रम)। |
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👥 कुल प्रतिभागी |
122 अधिकारी (भारतीय सैन्य/सिविल सेवा अधिकारी और 41 मित्र विदेशी अधिकारी)। |
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🎯 मुख्य विषय |
“भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य”। |
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🌍 वैश्विक दृष्टिकोण |
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सिद्धांत और ‘वैक्सीन मैत्री’ व आपदा प्रबंधन में भारत का नेतृत्व। |
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🛡️ राष्ट्रीय सुरक्षा का विजन |
लक्ष्य दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनना है, प्रभुत्व स्थापित करना नहीं बल्कि संप्रभुता की रक्षा करना। |
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🚀 भविष्य का लक्ष्य |
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का निर्माण और ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ व्यापार व तकनीक में मजबूत सहयोग। |











