A young mechanic working confidently, representing a new life after overcoming addiction.

गोरखपुर के इमरान :नशे की लत से आज़ादी और आत्मनिर्भरता का सफर

नशे के अंधकार से आत्मनिर्भरता के उजाले तक: गोरखपुर के इमरान की प्रेरणादायक कहानी”

गोरखपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

सही समय पर मिला इलाज, उचित सलाह और व्यवस्थित पुनर्वास किसी भी इंसान को मौत के मुंह से निकालकर एक नई और गरिमामयी ज़िंदगी दे सकता है।

नशे की लत किसी भी व्यक्ति की सेहत, पारिवारिक रिश्तों और रोज़ी-रोटी को पूरी तरह तबाह कर देती है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से इस चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एसी मैकेनिक का काम करने वाले 33 वर्षीय इमरान खान (बदला हुआ नाम) की जीवन यात्रा इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे पुनर्वास समर्थन एक बर्बाद हो चुके व्यक्ति को सुधार और वित्तीय स्वतंत्रता के शिखर तक ले जा सकता है।

12 साल की उम्र में लत और बर्बादी का मंजर

इमरान की बर्बादी की शुरुआत महज 12 साल की उम्र में ही हो गई थी, जब उन्होंने दोस्तों के दबाव में आकर सिगरेट पीना शुरू किया था। समय के साथ यह शौक एक जानलेवा लत में बदल गया।

  • नशे का जाल: सिगरेट से शुरू हुआ सफर तंबाकू, गुटखा, शराब, स्मैक, गांजा और यहां तक कि इंजेक्शन वाले खतरनाक ड्रग्स तक पहुंच गया।

  • शारीरिक और मानसिक पतन: भारी नशे के कारण इमरान की शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद खराब हो गई। व्यवहार में आक्रामकता और आर्थिक रूप से पूरी तरह दूसरों पर निर्भरता उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

  • पारिवारिक संघर्ष: इमरान एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते थे, जहां उनके दो भाई और छह बहनें थीं।

  • हालांकि उन्होंने एसी मरम्मत का काम सीख लिया था, लेकिन उनकी सारी कमाई नशे में उड़ जाती थी।

  • परिवार भारी मानसिक तनाव में था और इसी बीच उनके पिता को दिल की बीमारी के कारण बाईपास सर्जरी से गुजरना पड़ा।

‘पुनर्जन्म’ नशा मुक्ति केंद्र बना जीवन का टर्निंग पॉइंट

तमाम मुश्किलों और सामाजिक कलंक के बावजूद इमरान के परिवार ने हार नहीं मानी और उन्हें इलाज के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। 22 अक्टूबर 2019 को इमरान के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया।

  • उन्हें बासुदेव तिवारी सेवा संस्थान द्वारा संचालित पुनर्जन्म एकीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (IRCA), सोनबरसा, गोरखपुर में भर्ती कराया गया।

  • केंद्र में उन्हें डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification), मनोवैज्ञानिक परामर्श, प्रेरणादायक थेरेपी और व्यवस्थित पुनर्वास जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं।

  • इसके अलावा, सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, भावनात्मक सहयोग और परिवार परामर्श के जरिए उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत किया गया।

आज एक सफल एसी मैकेनिक और परिवार का संबल हैं इमरान

लगातार पेशेवर देखभाल, परिवार के अटूट सहयोग और स्वयं के दृढ़ संकल्प के बलबूते इमरान ने तीन महीने का पुनर्वास कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया और नशे की बेड़ियों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

आज इमरान पूरी तरह से नशामुक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वह एक स्व-रोजगार एसी मैकेनिक के रूप में काम कर रहे हैं।

वर्तमान में उनकी मासिक आय 30,000 रुपये से 40,000 रुपये के बीच है। उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि समाज में खोया हुआ सम्मान और परिवार का विश्वास भी पुनः प्राप्त कर लिया है।

📊 लत से आज़ादी का सफर (एक नज़र में)

महत्वपूर्ण पहलू (Key Aspects)

विवरण (Details)

👤 व्यक्ति व उम्र

इमरान खान (बदला हुआ नाम), उम्र 33 वर्ष

📍 स्थान

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

⚠️ नशे की शुरुआत व प्रकार

12 वर्ष की उम्र से; शराब, स्मैक, गांजा और इंजेक्शन वाले ड्रग्स की लत

🏥 पुनर्वास केंद्र (Rehab Center)

पुनर्जन्म एकीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (IRCA), सोनबरसा (बासुदेव तिवारी सेवा संस्थान द्वारा संचालित)

🛠️ वर्तमान पेशा व आय

स्वरोजगार (एसी मैकेनिक); मासिक आय ₹30,000 से ₹40,000

💡 प्रमुख उपचार प्रक्रिया

डिटॉक्सिफिकेशन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, प्रेरणादायक थेरेपी, और पारिवारिक काउंसलिंग

🎯 मुख्य संदेश

सही समय पर इलाज और परिवार का साथ नशे जैसी गंभीर बीमारी को भी हरा सकता है।